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टीसीएस नाशिक मामला: पांच आरोपियों को मिली जमानत

Briovo· 03 Aug 2026, 07:17 am IST1
टीसीएस नाशिक मामला: पांच आरोपियों को मिली जमानत

नाशिक की एक अदालत ने टीसीएस यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में पांच आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत ने चार्जशीट और जांच पूरी होने का हवाला देते हुए कहा कि गवाहों को डराने या सबूतों से छेड़छाड़ का कोई गंभीर डर नहीं है। टीसीएस नाशिक में काम करने वाले ये आरोपी यौन उत्पीड़न, धार्मिक अपमान और कथित जबरन धर्मांतरण से संबंधित कई एफआईआर में फंसे थे। अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की वित्तीय भेद्यता और जहरीले कार्यस्थल का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया था। हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि टिप्पणियां "हल्के-फुल्के मजाक" थीं। अदालत ने शर्तों के साथ जमानत दी, जिसमें पीड़िता के आस-पास के क्षेत्र तक पहुंच पर प्रतिबंध और साप्ताहिक पुलिस स्टेशन में अनिवार्य उपस्थिति शामिल है।

AI सारांश

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पांच आरोपियों को मिली जमानत

नाशिक की एक अदालत ने स्थानीय टीसीएस इकाई में यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण के हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी पांच व्यक्तियों को जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित विनायक खरकर ने 30 जुलाई को रज़ा रफीक मेमन, आसिफ आफताब अंसारी, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, शफी भीखन शेख और तौसीफ बिलाल अत्तर की जमानत याचिकाओं को मंजूरी दी।

जमानत का अदालत का तर्क

अदालत का फैसला इस अवलोकन पर आधारित था कि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका था और जांच वस्तुतः पूरी हो चुकी थी। न्यायाधीश ने कहा कि इस बात का कोई गंभीर डर नहीं था कि आरोपी जमानत पर रिहा होने पर गवाहों को धमकाएंगे या सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे। आरोपी तीन महीने से अधिक समय से हिरासत में थे।

आरोप और अभियोजन पक्ष का रुख

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि एक आरोपी, रज़ा रफीक मेमन ने यौन संबंधी टिप्पणियां कीं, पीड़िता को अनुचित तरीके से छुआ, यौन संबंध की मांग की और उसके धर्म को नीचा दिखाया। अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर उसके कार्यों का समर्थन किया। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी ने पीड़िता की खराब वित्तीय स्थिति का फायदा उठाया, जिससे उसे एक जहरीले कार्य वातावरण को सहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बचाव पक्ष के प्रतिवाद

बचाव पक्ष के वकील, अधिवक्ता राहुल कसलीवाल ने अभियोजन पक्ष के दावों का खंडन करते हुए कहा कि कथित टिप्पणियां कार्यालय के माहौल में केवल "हल्के-फुल्के मजाक" थीं। यह तर्क जमानत मांगने वाले पांच व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता को कम करने के लिए प्रस्तुत किया गया था।

कड़ी जमानत शर्तें लगाई गईं

जमानत देते हुए, अदालत ने आरोपियों पर कई कड़ी शर्तें लगाईं। उन्हें मुकदमे के समापन तक हर शनिवार को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच पुलिस स्टेशन जाना होगा। इसके अलावा, उन्हें सूचनादाता के कार्यस्थल या आवासीय परिसर में प्रवेश करने और सूचनादाता, गवाहों या मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने से प्रतिबंधित किया गया है।

जारी जांच और कंपनी की प्रतिक्रिया

एक विशेष जांच दल (एसआईटी) वर्तमान में टीसीएस इकाई में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न से संबंधित कुल नौ मामलों की जांच कर रहा है। टीसीएस ने सार्वजनिक रूप से उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति अपनी शून्य-सहिष्णुता नीति बताई है, यह पुष्टि करते हुए कि नाशिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न में कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

क्यों मायने रखता है

यह घटनाक्रम एक प्रमुख आईटी कंपनी के खिलाफ आरोपों से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले को प्रभावित करता है, जो कार्यस्थल सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रियाओं के बारे में सवाल खड़े करता है।

मुख्य तथ्य

  • Accused Granted Bail: Five individuals
  • Location of Incident: TCS Nashik unit
  • Charges: Sexual harassment, forced conversion
  • Court Ruling Date: July 30 (bail granted)
  • Court Observation: Investigation practically complete, no threat of tampering
  • Bail Conditions: Prohibited from contacting informant/witnesses, weekly police visits

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