चुनाव हार के बाद TMC में अंदरूनी कलह, टूट का खतरा

हालिया चुनावी हार के बाद, पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) आंतरिक कलह और इस्तीफों की एक श्रृंखला से जूझ रही है, जिससे इसके संभावित विभाजन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। दो टीएमसी विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने एक पार्टी प्रस्ताव पर कथित जाली हस्ताक्षर को लेकर स्पीकर से शिकायत की, जिसके बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी की चुनावी रणनीति और कार्यप्रणाली को हार का जिम्मेदार ठहराया है। ममता बनर्जी इस अस्थिरता का कारण भाजपा की साजिशों को बताती हैं, जिसमें पार्टी सदस्यों को धमकियाँ और वित्तीय प्रलोभन देने का आरोप है, जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रितेश तिवारी का दावा है कि टीएमसी स्वार्थी तत्वों और सार्वजनिक मोहभंग के कारण स्वाभाविक रूप से भंग हो जाएगी।
क्यों मायने रखता है
टीएमसी के भीतर की आंतरिक कलह पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकती है, जिससे पार्टी कमजोर हो सकती है और उसके शासन पर असर पड़ सकता है। यह मामला दल-बदल और राजनीतिक दांव-पेच की गतिशीलता को उजागर करता है, जो राज्य की राजनीति और चुनावी प्रक्रियाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यूपीएससी/एसएससी के लिए, यह राजनीतिक दलों, चुनावी सुधारों और संघवाद जैसे विषयों से संबंधित है।
मुख्य तथ्य
- •Accused MLAs: Ritabrata Banerjee, Sandipan Saha
- •Resigned from TMC: Riju Dutta, Kakoli Ghosh Dastidar
- •Number of MLAs who did not attend meeting: Approx. 20
- •Investigating agency: CID
- •BJP State President: Ritesh Tiwari (Kashipur-Belgachia MLA)
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