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राजनाथ सिंह का 2015 का मंत्रियों के इस्तीफे पर बयान फिर वायरल

Briovo· 25 Jul 2026, 08:25 pm IST
राजनाथ सिंह का 2015 का मंत्रियों के इस्तीफे पर बयान फिर वायरल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 2015 का बयान, "हमारे मंत्रियों को इस्तीफा नहीं देना पड़ता। यह उनकी (कांग्रेस) सरकार नहीं, यह NDA सरकार है," केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हालिया इस्तीफे के बाद वायरल हो गया है। प्रधान ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दिया, जो पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल में किसी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का केवल दूसरा इस्तीफा है। यह टिप्पणी मूल रूप से पूर्व IPL कमिश्नर ललित मोदी से जुड़े विवाद के दौरान की गई थी, जब विपक्ष ने वरिष्ठ भाजपा नेताओं के इस्तीफे की मांग की थी। यह क्लिप अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की जा रही है, और इसकी तुलना मौजूदा राजनीतिक घटनाओं से की जा रही है।

AI सारांश

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पुराना बयान, नया संदर्भ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 2015 का वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि NDA के मंत्रियों को इस्तीफा नहीं देना पड़ता, ऑनलाइन फिर सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा देने के बाद यह क्लिप वायरल हो गई है। यह पुराना बयान अब सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर साझा किया जा रहा है, जिससे मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों से इसकी तुलना की जा रही है।

2015 के बयान का मूल

राजनाथ सिंह ने यह वायरल बयान जून 2015 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया था। वह ललित मोदी विवाद के दौरान तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफे की विपक्ष की मांगों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। सिंह ने दृढ़ता से कहा था कि उनकी सरकार NDA सरकार है, कांग्रेस की नहीं, जिसका अर्थ था कि इस्तीफे की कोई आवश्यकता नहीं है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दे दिया। ये प्रदर्शन NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण शुरू हुए थे। उनका इस्तीफा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है, जो छात्रों और विपक्षी दलों के निरंतर दबाव के बाद आया है।

दुर्लभ मंत्री का निकास

प्रधान का इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के इस्तीफा देने का केवल दूसरा उदाहरण है। इससे पहले, एम.जे. अकबर ने अक्टूबर 2018 में #MeToo आंदोलन के दौरान आरोपों के बाद विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। यह मौजूदा प्रशासन में ऐसे उच्च-स्तरीय निकासों की दुर्लभता को उजागर करता है।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रभाव

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल सहित छात्र विरोध प्रदर्शनों ने जवाबदेही की मांगों को तेज कर दिया। बावजूद इसके कि सरकार ने पहले कहा था कि प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, निरंतर दबाव के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद से व्यापक राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई है।

क्यों मायने रखता है

राजनाथ सिंह के पुराने बयान का फिर से सामने आना राजनीतिक दोहरे मानकों को उजागर करता है और मंत्री पद की जवाबदेही से जुड़ी मौजूदा घटनाओं को ऐतिहासिक संदर्भ देता है। यह सरकारी पारदर्शिता और विवादों के दौरान मंत्रियों पर पड़ने वाले दबाव पर सार्वजनिक बहस छेड़ता है।

मुख्य तथ्य

  • Remark year: 2015
  • Minister whose remark resurfaced: Rajnath Singh
  • Minister who resigned: Dharmendra Pradhan
  • Reason for resignation: NEET irregularities protests
  • Previous resignation before Pradhan: M.J. Akbar (2018)
  • Total resignations in Modi's tenure: 2 (Pradhan and Akbar)

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