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वंदे मातरम् अपमान पर 3 साल तक की जेल; मानसून सत्र में नया बिल

Briovo· 17 Jul 2026, 08:58 pm IST
वंदे मातरम् अपमान पर 3 साल तक की जेल; मानसून सत्र में नया बिल

केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में 'वंदे मातरम्' को कानूनी संरक्षण देने के लिए एक नया संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। यदि 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल' पारित हो जाता है, तो वंदे मातरम् का अपमान करने, इसके गायन में बाधा डालने या व्यवधान पैदा करने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान होगा। इसका उद्देश्य वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के समान कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, जो वर्तमान में 1971 के 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट' के तहत आते हैं। यह निर्णय वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के साथ आया है, जिसके पूर्ण गायन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

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राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण

भारत सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान एक नया संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को कानूनी संरक्षण प्रदान करना है, जैसा कि पहले से ही राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान को प्राप्त है। मौजूदा 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' वर्तमान में इन प्रतीकों को कवर करता है।

अपमान करने पर दंड

विधेयक पारित होने पर, 'वंदे मातरम्' के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर, जिसमें इसके गायन में बाधा डालना या व्यवधान पैदा करना शामिल है, एक दंडनीय अपराध बन जाएगा। अपराधियों को तीन साल तक की कैद, आर्थिक जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। यह प्रावधान राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना चाहता है।

150वीं जयंती का संदर्भ

यह विधायी पहल ऐसे समय में आई है जब राष्ट्र 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। हाल के महीनों में, केंद्र सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के अनिवार्य गायन और उसके बाद राष्ट्रगान गाने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गीत के सभी छह छंद गाए जाने चाहिए।

छंदों पर ऐतिहासिक विवाद

'वंदे मातरम्' के सभी छह छंदों को गाने का मुद्दा 1937 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस के एक फैसले में निहित है, जिसमें सार्वजनिक सभाओं में केवल पहले दो छंदों को गाने का निर्णय लिया गया था। यह निर्णय कुछ मुस्लिम समुदायों द्वारा बाद के छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों पर आपत्ति के कारण प्रभावित हुआ था। प्रस्तावित विधेयक ने इस लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक विवाद को फिर से जगा दिया है।

राजनीतिक बहस फिर से तेज

प्रस्तावित संशोधन ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आदान-प्रदान को तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर 'वंदे मातरम्' का अनादर करने और दबाव में इसके गायन को बदलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि गीत को छोटा करने का निर्णय महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर सहित राष्ट्रीय नेताओं की व्यापक सहमति से लिया गया था, न कि केवल नेहरू द्वारा।

संसद में अपेक्षित बहस

जबकि सरकार इस बात पर जोर देती है कि विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के लिए कानूनी सुरक्षा को औपचारिक बनाना है न कि पुराने विवादों को पुनर्जीवित करना, कड़े विरोध की उम्मीद है। इस मुद्दे की राजनीतिक संवेदनशीलता और ऐतिहासिक संदर्भ को देखते हुए, संसद के आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान तीव्र बहस और संभावित व्यवधान देखने को मिल सकता है।

क्यों मायने रखता है

यह विधेयक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 'वंदे मातरम्' को अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के समान कानूनी दर्जा देता है, जिससे गीत के गायन और राष्ट्रीय सम्मान में इसके स्थान से जुड़ी लंबी राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज हो सकती है।

मुख्य तथ्य

  • Bill Name (Proposed): Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill
  • Proposed Penalty: Up to 3 years jail, fine, or both
  • Existing Law: Prevention of Insults to National Honour Act, 1971
  • Symbols Currently Protected: National Anthem, National Flag, Constitution
  • Occasion for Bill: 150th anniversary of Vande Mataram
  • Parliamentary Session: Monsoon Session

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