राजस्थान में तिल की फसल को फाइलोईडी रोग का खतरा
राजस्थान में खरीफ सीजन के दौरान तिल की फसल को फाइलोईडी रोग से गंभीर खतरा है, जिससे उपज में 30% से 100% तक का नुकसान हो सकता है। फाइटोप्लाज्मा नामक सूक्ष्म जीवाणु और लीफहॉपर कीटों से फैलने वाला यह रोग फूलों को पत्तों जैसी संरचनाओं में बदल देता है और पौधों को झाड़ीनुमा बना देता है, जिससे बीज उत्पादन काफी कम हो जाता है। कृषि विभाग ने किसानों को संक्रमित पौधों को हटाने और लीफहॉपर को नियंत्रित करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड, डाइमेथोएट, एसीटामिप्रिड या थायमेथोक्साम जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी है। कोई सीधा इलाज न होने के कारण प्रारंभिक रोकथाम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
AI सारांश
3 bulletsखरीफ फसल को खतरा
राजस्थान में खरीफ मौसम की तिल की फसल फाइलोईडी रोग के गंभीर खतरे का सामना कर रही है। कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि इस रोग को प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है, जिससे उपज में भारी नुकसान होगा। किसानों को सतर्क रहने और जोखिम को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी गई है।
रोग को समझना
फाइलोईडी रोग फाइटोप्लाज्मा नामक सूक्ष्म जीवाणु के कारण होता है, जो पौधों की फ्लोएम नलिकाओं में पाया जाता है। यह बीज के माध्यम से नहीं फैलता, बल्कि मुख्य रूप से लीफहॉपर (जेसिड) जैसे रस चूसने वाले कीटों द्वारा एक पौधे से दूसरे पौधे तक पहुंचता है। ये कीट संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों में रोग फैलाते हैं, जिससे खेत में इसका तेजी से प्रकोप होता है।
दृश्य लक्षण और प्रभाव
वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक राजेंद्र भाकर ने बताया कि प्रभावित पौधों में फूल अपनी सामान्य संरचना खोकर हरे पत्तों जैसे दिखने लगते हैं। पौधों में अत्यधिक शाखाएं निकलने से वे झाड़ीनुमा हो जाते हैं, और फलियां बहुत कम बनती हैं, जिससे बीज उत्पादन लगभग समाप्त हो जाता है। प्रारंभिक संक्रमण से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
निवारक उपायों की सलाह
फाइलोईडी का कोई सीधा उपचार उपलब्ध न होने के कारण, रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेत में रोगग्रस्त पौधे दिखाई देते ही उन्हें जड़ सहित उखाड़कर नष्ट कर दें। लीफहॉपर कीटों के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल, डाइमेथोएट 30% ईसी, एसीटामिप्रिड या थायमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी जैसे कीटनाशकों का छिड़काव किया जा सकता है।
छिड़काव के दिशा-निर्देश
इमिडाक्लोप्रिड के लिए 0.25 मिली प्रति लीटर, डाइमेथोएट के लिए 1.5 मिली प्रति लीटर, एसीटामिप्रिड के लिए 0.3 ग्राम प्रति लीटर, या थायमेथोक्साम के लिए 0.25 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़काव की सलाह दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव दोहराया जा सकता है। यह छिड़काव हमेशा साफ मौसम में और कृषि विभाग के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए ताकि प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
क्यों मायने रखता है
फाइलोईडी रोग तिल की फसलों को नष्ट करके किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है, जो खरीफ की एक प्रमुख उपज है। आजीविका की रक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र जागरूकता और निवारक उपाय महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य तथ्य
- •Disease Name: Phyllody
- •Crop Affected: Sesame (Til)
- •Season: Kharif
- •Cause: Phytoplasma (microorganism)
- •Vector: Leafhoppers (Jassids)
- •Potential Yield Loss: 30-100%
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