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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट सुनवाई के वीडियो अनधिकृत शेयरिंग, एडिटिंग पर लगाई रोक

Briovo· 25 Jul 2026, 10:27 am IST
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट सुनवाई के वीडियो अनधिकृत शेयरिंग, एडिटिंग पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अदालत की पूर्व अनुमति के बिना अनधिकृत रूप से साझा करने, संपादित करने और मुद्रीकरण करने पर रोक लगा दी है। यह अंतरिम आदेश रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग के बारे में चिंताओं के जवाब में आया है, जिन्हें अक्सर संदर्भ से बाहर करके व्यावसायिक लाभ के लिए या भ्रामकBख्यान बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अदालत ने जोर देकर कहा कि यह "24x7 मनोरंजन चैनल" नहीं है और इसका उद्देश्य निष्पक्ष समाचार रिपोर्टिंग को बनाए रखते हुए न्यायिक सामग्री के प्रसार को विनियमित करना है। केंद्र, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और उच्च न्यायालयों को उनकी प्रतिक्रियाओं और दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

AI सारांश

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SC ने कोर्ट वीडियो के दुरुपयोग पर लगाई लगाम

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत वितरण, परिवर्तन और मुद्रीकरण पर प्रतिबंध लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। इस निर्देश का उद्देश्य सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना उचित संदर्भ या अनुमति के चुनिंदा संपादित क्लिप के उपयोग की बढ़ती चिंता से निपटना है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता को बनाए रखने और उनके शोषण को रोकने के लिए है।

'24x7 मनोरंजन चैनल' नहीं कोर्ट

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने टिप्पणी की कि अदालतें "24x7 मनोरंजन चैनल" नहीं हैं। यह बयान न्यायिक कार्यवाही तक पहुंच और प्रसार को विनियमित करने के न्यायपालिका के इरादे को रेखांकित करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें मनोरंजन के उद्देश्यों के लिए तुच्छ या दुरुपयोग न किया जाए। अदालत का उद्देश्य पारदर्शिता और न्यायिक मर्यादा बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना है।

पत्रकार हर्षिता ग्रोवर द्वारा जनहित याचिका

ये अंतरिम निर्देश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए जारी किए गए। PIL में अदालत की कार्यवाही की ऑडियोविजुअल रिकॉर्डिंग की क्लिपिंग, संपादन, प्रसार और मुद्रीकरण को विनियमित करने के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए थे। सुश्री ग्रोवर की याचिका ने न्यायिक सामग्री के गलत बयानी और व्यावसायिक शोषण को रोकने के लिए एक ढांचे की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

भ्रामक सामग्री और AI पर चिंता

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग अंशों को अक्सर संदर्भ से बाहर कर दिया जाता है, जिससे वायरल सामग्री बनती है जो न्यायपालिका को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कोर्टरूम वीडियो में हेरफेर करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संभावित दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की, और कड़े नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य न्यायाधीश कांत ने व्यक्तिगत रूप से प्रिंट मीडिया में अपनी टिप्पणियों के गलत बयानी का अनुभव करने की पुष्टि की।

हितधारकों को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, मेटा और एक्स सहित विभिन्न सोशल मीडिया मध्यस्थों और सभी उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस याचिका पर प्रतिक्रिया मांगते हैं और केंद्र सरकार को राहत लागू करने के लिए नोडल मंत्रालयों का प्रस्ताव देने का निर्देश देते हैं। उच्च न्यायालयों को सुप्रीम कोर्ट के लाइवस्ट्रीमिंग दिशानिर्देशों को अपनाने और निरंतर लाइवस्ट्रीमिंग के प्रभाव पर रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

क्यों मायने रखता है

यह फैसला अदालत की कार्यवाही के गलत बयानी और व्यावसायिक शोषण को रोककर न्यायपालिका की अखंडता, मर्यादा और सार्वजनिक धारणा को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य तथ्य

  • Court Order Date: July 25, 2026
  • Prohibition: Unauthorised sharing, editing, monetization of court recordings
  • Authority for Permission: Registrar General of High Courts or Secretary General of Supreme Court
  • Petitioner: Journalist Harshita Grover
  • Issue Highlighted: Misuse of out-of-context clips, potential for AI manipulation

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