जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिटायर, ले. जनरल धीरज सेठ सेना प्रमुख बने
जनरल उपेंद्र द्विवेदी भारतीय थल सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को कमान सौंपी गई। द्विवेदी ने अपनी चार दशकों की सेवा के लिए आभार व्यक्त किया, इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया। उन्होंने 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' और 'ऑपरेशन सिंदूर' के साथ-साथ अपने कार्यकाल में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ी हुई तालमेल पर प्रकाश डाला। उन्होंने भविष्य के युद्ध को संयुक्त और एकीकृत बताते हुए अपने उत्तराधिकारी पर सेना को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का भरोसा जताया। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, एनडीए के पूर्व छात्र हैं और उनके पास चार दशकों से अधिक का अनुभव है, उन्होंने विभिन्न प्रमुख इकाइयों और अभियानों की कमान संभाली है।
AI सारांश
3 bulletsएक युग का अंत: जनरल द्विवेदी की विदाई
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चार दशकों से अधिक की समर्पित सेवा के बाद भारतीय सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्ति ले ली है। एक भावुक विदाई समारोह में, उन्होंने राष्ट्र और उसके सशस्त्र बलों की सेवा करने के अवसर के लिए immense आभार व्यक्त किया। आधिकारिक समारोह से पहले उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ले. जनरल धीरज सेठ ने संभाली कमान
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना के नए प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। जनरल द्विवेदी ने अपने उत्तराधिकारी पर पूरा विश्वास व्यक्त किया, ले. जनरल सेठ के अनुभव और नेतृत्व गुणों पर प्रकाश डाला। उनका मानना है कि ले. जनरल सेठ के मार्गदर्शन में भारतीय सेना नई ऊंचाइयों को छुएगी।
द्विवेदी का कार्यकाल: मुख्य अंश
अपने विदाई संबोधन के दौरान, जनरल द्विवेदी ने अपने कार्यकाल पर विचार करते हुए उत्तरी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर उच्च स्तर की तैयारी और सतर्कता का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' और 'ऑपरेशन सिंदूर' को सेना की क्षमताओं और प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया। उन्होंने तीनों सेवाओं के बीच बढ़ी हुई तालमेल पर भी जोर दिया।
भविष्य का युद्ध: संयुक्त और एकीकृत दृष्टिकोण
जनरल द्विवेदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती प्रकृति पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य का युद्ध संयुक्त, एकीकृत और थिएटर-आधारित होगा। उन्होंने निर्णय लेने और कार्रवाई में सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच सहज रूप से काम करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एकीकृत दृष्टिकोण भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए 'न्यू नॉर्मल' है।
ले. जनरल सेठ: एक अनुभवी नेता
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में भारतीय सेना के आर्मर्ड कोर में कमीशन किए गए थे। चालीस से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, उन्होंने एक बख्तरबंद ब्रिगेड और प्रतिष्ठित सुदर्शन चक्र कोर सहित विभिन्न प्रमुख इकाइयों की कमान संभाली है। उनका व्यापक अनुभव सैन्य अभियानों, रणनीतिक योजना और रक्षा प्रबंधन तक फैला हुआ है।
क्यों मायने रखता है
भारतीय सेना के शीर्ष पद पर नेतृत्व परिवर्तन एक नए युग का प्रतीक है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के व्यापक अनुभव से बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच सेना की परिचालन क्षमताओं और रणनीतिक दृष्टि को और मजबूत होने की उम्मीद है।
मुख्य तथ्य
- •Outgoing Chief: General Upendra Dwivedi
- •New Chief: Lieutenant General Dheeraj Seth
- •Dwivedi's Service Duration: Over 40 years
- •Key Operations Mentioned by Dwivedi: Operation Snow Leopard, Operation Sindoor
- •Seth's Alma Mater: National Defence Academy (NDA)
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