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मौलाना नोमानी: भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं

Briovo· 19 Jun 2026, 08:53 pm IST
मौलाना नोमानी: भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं

एआईएमपीएलबी सदस्य मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी ने दावा किया है कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं हैं. उन्होंने तर्क दिया कि अनुसूचित जाति, आदिवासी, सिख, ईसाई, बौद्ध और लिंगायत सहित कई समुदाय, जिन्हें पारंपरिक रूप से हिंदू माना जाता रहा है, उनकी अलग पहचान है. नोमानी ने कहा कि यह निष्कर्ष तीन दशकों के शोध पर आधारित है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि "धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं" ने "फासीवादी हिंदुओं" को देश पर हावी होने दिया, जिससे बहस छिड़ गई है. उन्होंने जाटों की कथित बैठकों का हवाला दिया जहां सिखों के रूप में पंजीकरण पर चर्चा हुई, हालांकि कोई विशेष प्रमाण नहीं दिया.

AI सारांश

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हिंदू बहुसंख्यक पर विवादित बयान

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के एक प्रमुख सदस्य मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी ने यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं हैं. उन्होंने भारत में एक इस्लामिक शिखर सम्मेलन के दौरान ये टिप्पणियां कीं, जिससे देश की जनसांख्यिकीय संरचना की पारंपरिक समझ को चुनौती मिली.

पारंपरिक जनसांख्यिकी को चुनौती

नोमानी ने तर्क दिया कि उनके तीन दशकों के शोध के आधार पर एक सटीक जनसांख्यिकीय विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न समुदाय, जिन्हें पारंपरिक रूप से हिंदू के रूप में वर्गीकृत किया गया है, उनकी अलग-अलग पहचान है. उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जाति, आदिवासी, सिख, ईसाई, बौद्ध और लिंगायत को ऐसे समूहों के रूप में नामित किया, जिन्हें हिंदू बहुसंख्यक का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए.

आदिवासी मूल निवासी

अपने दावे पर आगे विस्तार करते हुए, मौलाना नोमानी ने जोर दिया कि आदिवासी समुदाय भारत के मूल और सबसे पुराने निवासी हैं. उन्होंने दावा किया कि इन समुदायों को हिंदू धर्म के दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए, जिससे उनकी अलग पहचान के तर्क को बल मिला.

'धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं' पर आरोप

अपने संबोधन के एक अधिक विवादास्पद हिस्से में, नोमानी ने "धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं" पर अतीत में मुसलमानों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यही "धर्मनिरपेक्ष हिंदू" देश को "फासीवादी हिंदुओं" के हाथों में जाने के लिए जिम्मेदार हैं, एक ऐसा बयान जिसने महत्वपूर्ण ध्यान और आलोचना बटोरी है.

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया, अपुष्ट दावे

मौलाना नोमानी के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिससे सार्वजनिक रूप से व्यापक बहस और विभिन्न प्रतिक्रियाएँ हुईं. उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कथित बैठकों के बारे में अपुष्ट दावों का भी हवाला दिया जहाँ जाट समुदाय के सदस्यों ने कथित तौर पर खुद को सिख के रूप में पंजीकृत करने पर चर्चा की थी.

क्यों मायने रखता है

मौलाना सज्जाद नोमानी के विवादास्पद बयान, जिसमें भारत में हिंदुओं के बहुसंख्यक दर्जे पर सवाल उठाया गया है और "फासीवादी हिंदुओं" के उदय में उनकी भूमिका का आरोप लगाया गया है, सांप्रदायिक बहस को जन्म दे सकता है और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है. उनके बयान स्थापित जनसांख्यिकीय समझ को चुनौती देते हैं और धार्मिक तथा जाति-आधारित पहचान से संबंधित राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे संभावित रूप से और ध्रुवीकरण हो सकता है.

मुख्य तथ्य

  • Speaker: Maulana Khalilur Rahman Sajjad Nomani, AIMPLB Member
  • Claim: Hindus are not a majority in India
  • Basis: 30 years of ground research; communities like Sikhs, Christians, Buddhists, Scheduled Castes, Adivasis, and Lingayats have separate identities
  • Allegation: "Secular Hindus" harmed Muslims and handed the country to "fascist Hindus"
  • Date of Statement: June 19, 2026

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