भागवत ने RSS के लिए खड़गे की पारदर्शिता की मांग को खारिज किया
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की संगठन के पंजीकरण, धन और संपत्ति के संबंध में पारदर्शिता की मांग को खारिज कर दिया है, इसे राजनीति से प्रेरित बताया। भागवत ने कहा कि आरएसएस को सरकारी धन प्राप्त नहीं होता है और इसलिए उसे पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। खड़गे ने 13 जून को भागवत को पत्र लिखकर इस बात पर जोर दिया था कि देशव्यापी उपस्थिति वाले संगठन को एनजीओ और अन्य संस्थानों की तरह ही सार्वजनिक जांच के अधीन होना चाहिए। भागवत ने तर्क दिया कि आरएसएस अपनी शाखाओं के माध्यम से खुले तौर पर काम करता है और इसे पहले अदालतों और कर अधिकारियों द्वारा "व्यक्तियों के निकाय" के रूप में मान्यता दी गई है जो आयकर से मुक्त है।
राजनीतिक मंशा का आरोप
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की पारदर्शिता की मांग को खारिज कर दिया है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। भागवत की यह प्रतिक्रिया 14 जून, 2026 को त्रिशूर में आरएसएस शताब्दी आउटरीच कार्यक्रम के दौरान आई। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी मांगों का जवाब देने का कोई कारण नहीं दिखता।
खड़गे की पारदर्शिता की मांग
यह विवाद 13 जून, 2026 को प्रियांक खड़गे द्वारा आरएसएस प्रमुख को लिखे गए पत्र से शुरू हुआ। खड़गे ने आरएसएस के पंजीकरण की स्थिति, धन स्रोतों, आय, व्यय और संपत्ति के बारे में विवरण मांगा था। उन्होंने तर्क दिया कि देशव्यापी उपस्थिति वाले संगठन को एनजीओ और अन्य संस्थानों की तरह ही सार्वजनिक जांच के अधीन होना चाहिए।
सरकारी फंडिंग नहीं, पंजीकरण भी नहीं
मोहन भागवत ने आरएसएस के रुख का बचाव करते हुए कहा कि संगठन को सरकारी धन प्राप्त नहीं होता है, इसलिए आधिकारिक पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस अपनी दैनिक शाखाओं और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से खुले तौर पर काम करता है, जिससे उसकी गतिविधियां सार्वजनिक रूप से ज्ञात होती हैं।
ऐतिहासिक मान्यता और छूट
भागवत ने बताया कि आरएसएस को अधिकारियों द्वारा मान्यता प्राप्त होने का इतिहास रहा है, जिसमें पिछली पाबंदियां भी शामिल हैं जिन्हें बाद में हटा लिया गया था। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अदालतों और कर अधिकारियों ने आरएसएस को "व्यक्तियों के निकाय" के रूप में स्वीकार किया है और इसे आयकर छूट दी है, जिससे इसके परिचालन ढांचे को और वैधता मिलती है।
क्यों मायने रखता है
यह चल रही बहस आरएसएस की परिचालन पारदर्शिता और जवाबदेही पर लंबे समय से चली आ रही जांच को उजागर करती है, विशेष रूप से इसके वित्त पोषण और कानूनी स्थिति के संबंध में, जो एक प्रमुख कांग्रेस नेता और हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के प्रमुख के बीच राजनीतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दे रही है।
मुख्य तथ्य
- •Demand Origin: Karnataka Home Minister Priyank Kharge's letter to RSS chief Mohan Bhagwat on June 13, 2026.
- •Kharge's Demand: Transparency on RSS registration, funding, income, expenditure, and assets.
- •Bhagwat's Response Date: June 14, 2026, during an RSS centenary outreach program in Thrissur.
- •Bhagwat's Rationale: Demand is politically motivated; RSS receives no government funds, hence no registration needed.
- •RSS Legal Status: Recognized by courts and tax authorities as a 'body of individuals' with income-tax exemptions.
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