गुजरात-मुंबई में बच्चा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़
गुजरात और मुंबई के बीच सक्रिय एक अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिससे आठ दिन के एक शिशु को बचाया गया है। पुलिस ने एक दंपति को बच्चे को बेचने के लिए ले जाते हुए पकड़ा, जिससे एक सुनियोजित सिंडिकेट का खुलासा हुआ। जांच से पता चलता है कि पिछले 45 दिनों में कम से कम चार नवजात बच्चों की तस्करी की गई थी। इस गिरोह में गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में दलाल, ट्रांसपोर्टर और खरीदार शामिल थे। बचाए गए बच्चे को मुंबई में ₹3 लाख में बेचा जाना था, जबकि आर्थिक रूप से परेशान माता-पिता को ₹2 लाख का वादा किया गया था। अब सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में कई टीमें लगी हुई हैं।
AI सारांश
3 bulletsवडोदरा में अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़
वडोदरा सिटी क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी गिरोह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया और आठ दिन के एक शिशु को बचाया। यह अभियान एक गुप्त सूचना के साथ शुरू हुआ कि एक दंपति नवजात को मुंबई ले जा रहा था। इससे मनोज रावल और उनकी पत्नी वीना को एक बस में बच्चे के साथ पकड़ा गया।
सिंडिकेट की कार्यप्रणाली
जांच से गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में दलालों, ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से जुड़ा एक सुनियोजित नेटवर्क सामने आया। साबरकांठा जिले के आर्थिक रूप से परेशान माता-पिता को उनके बच्चे के लिए ₹2 लाख का वादा किया गया था, जिसे मुंबई में ₹3 लाख में बेचा जाना था। बिचौलियों और ट्रांसपोर्टरों को इन अवैध लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए कमीशन मिलता था।
सरगना और अन्य तस्करी के मामले
मुंबई में डॉक्टर बनकर घूमने वाला एक ऑटो-रिक्शा चालक सोहेल नादाब कथित सरगना माना जा रहा है, जो व्हाट्सएप कॉल के जरिए संचालन का समन्वय करता था। जांच में यह भी पता चला है कि पिछले छह हफ्तों में बनासकांठा से तीन और नवजात बच्चों की अलग-अलग एजेंटों के माध्यम से मुंबई में तस्करी की गई थी। ये मामले सिंडिकेट के संचालन की व्यापक प्रकृति को उजागर करते हैं।
जांच जारी और गिरफ्तारियां
सिंडिकेट के शेष सदस्यों को पकड़ने के लिए संबंधित राज्यों में कई जांच दल भेजे गए हैं। बचाए गए बच्चे के माता-पिता को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, जबकि मोडासा के दो प्रमुख आरोपी, जो वर्तमान में मुंबई में रहते हैं, फरार हैं। बच्चे की पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण किया जाएगा, इससे पहले कि उसे बाल कल्याण समिति की देखरेख में रखा जाए।
क्यों मायने रखता है
यह मामला बच्चों की तस्करी के लगातार जारी मुद्दे को उजागर करता है, जो कमजोर परिवारों का फायदा उठाता है और राज्य की सीमाओं के पार खामियों का फायदा उठाता है। यह नवजात शिशुओं को शोषण से बचाने के लिए मजबूत कानून प्रवर्तन और सामाजिक सहायता प्रणालियों की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देता है।
मुख्य तथ्य
- •Rescued Infant's Age: 8 days old
- •Trafficking Route: Gujarat to Mumbai
- •Number of Babies Trafficked…: At least 4 in 45 days
- •Target Selling Price in Mumbai: ₹3 lakh
- •Parents' Promised Amount: ₹2 lakh
- •States Involved: Gujarat, Maharashtra, Rajasthan
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