बॉम्बे HC ने तरुण तेजपाल को 2013 यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया, 10 साल की सजा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। गोवा खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल के पछतावे की कमी का हवाला देते हुए और "नो मीन्स नो" पर जोर देते हुए अधिकतम सजा की मांग की। तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने उनके मुवक्किल के 62 वर्ष की उम्र में पहली बार अपराधी होने के कारण नरमी बरतने की गुहार लगाई और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए समय मांगा। तेजपाल ने खुद अदालत को संबोधित किया, राजनीतिक प्रतिशोध का दावा किया और अपील करने का इरादा व्यक्त किया।
AI सारांश
3 bulletsहाई कोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर शामिल थे, ने गुरुवार, 6 अगस्त, 2026 को तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। इस फैसले ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तेजपाल को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के पिछले फैसले को रद्द कर दिया।
सजा की मात्रा और दलीलें
यौन उत्पीड़न के लिए तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल के पछतावे की पूरी कमी और "नो मीन्स नो" के महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत पर जोर देते हुए अधिकतम संभव सजा की जोरदार वकालत की। इसके विपरीत, तेजपाल का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने तेजपाल की 62 वर्ष की आयु और यह उनका पहला अपराध होने का हवाला देते हुए नरमी की अपील की।
तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए मांगा समय
दोषसिद्धि के बाद, आबाद पोंडा ने अदालत से आठ सप्ताह के लिए दोषसिद्धि के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया ताकि तेजपाल आत्मसमर्पण कर सकें और हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। तेजपाल ने खुद बेंच को संबोधित करते हुए कहा कि वह उच्च न्यायालय में अपील करना चाहते हैं और राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार होने का दावा किया।
लगाए गए विशिष्ट आरोप और जुर्माना
अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया, जिसमें यौन उत्पीड़न के लिए 376(2)(एफ) और 376(2)(के), और संबंधित अपराधों के लिए 354ए और 354बी शामिल हैं। 10 साल के कठोर कारावास के अलावा, तेजपाल पर धारा 376(2)(एफ) और धारा 376(2)(के) के तहत कुल ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। अन्य आरोपों के लिए अतिरिक्त जुर्माना और कारावास की शर्तें लगाई गईं।
क्यों मायने रखता है
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा यह दोषसिद्धि पिछले बरी को पलट देती है और यौन उत्पीड़न के मामलों पर न्यायपालिका के रुख को रेखांकित करती है, खासकर सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े मामलों में। यह "नो मीन्स नो" के कानूनी सिद्धांत पर प्रकाश डालता है और ऐसे मामलों को कैसे संभाला जाता है, घटना के वर्षों बाद भी, सार्वजनिक विश्वास और कानूनी जवाबदेही को प्रभावित करता है, इसके लिए एक मिसाल कायम करता है।
मुख्य तथ्य
- •Conviction Date: August 6, 2026
- •Sentence: 10 years rigorous imprisonment
- •Case Origin: 2013 sexual assault incident
- •Court: Bombay High Court, Goa Division Bench
- •Acquittal Overturned: Trial court's previous acquittal
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…