राजस्थान HC ने स्थानीय चुनावों पर कड़ा रुख अपनाया; 20 जुलाई की समय सीमा तय की
राजस्थान उच्च न्यायालय ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लंबी देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और अन्य अधिकारियों को चेतावनी दी है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और सरकार को चुनाव की तारीखें तय करने, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पेश करने और आरक्षण लॉटरी निकालने के लिए 20 जुलाई तक की समय सीमा दी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि जिम्मेदार एजेंसियां समय सीमा पूरी करने में विफल रहती हैं तो वह चुनाव कराने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति कर सकता है। यह फैसला सरकार द्वारा 31 जुलाई की समय सीमा से आगे विस्तार मांगने के बाद आया है, क्योंकि ओबीसी राजनीतिक आरक्षण रिपोर्ट अंतिम रूप नहीं दी गई थी। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को 20 जुलाई को पूरी जानकारी के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
AI सारांश
3 bulletsन्यायालय की कड़ी चेतावनी
राजस्थान उच्च न्यायालय ने पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के लंबे समय से लंबित चुनावों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने निरंतर देरी और प्रशासनिक ढिलाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की, राज्य चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की। यहां तक कि मौखिक रूप से यह भी कहा कि यदि जिम्मेदार एजेंसियां समय पर चुनाव कराने में असमर्थ हैं, तो उच्च न्यायालय प्रक्रिया की देखरेख के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति करेगा।
20 जुलाई की समय सीमा जारी
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को सोमवार, 20 जुलाई, 2026 तक चुनाव की तारीखों का रोडमैप तैयार करने, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आरक्षण की लॉटरी निकालने का निर्देश दिया है। सभी संबंधित अधिकारियों को उसी दिन पूरी जानकारी के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। यह अल्टीमेटम तब आया है जब अदालत ने सरकार की 31 जुलाई से परे चुनाव की समय सीमा बढ़ाने की दलील को अस्वीकार कर दिया।
चुनाव आयुक्त ने देरी स्वीकार की
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश हुए राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव कराने में देरी स्वीकार की। उन्होंने पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभागों से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और महिला आरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी की अनुपलब्धता को मुख्य कारण बताया। चुनाव आयोग की ईवीएम और मतदाता सूचियों के साथ तैयारी के बावजूद, इन विभागीय देरी ने प्रक्रिया को रोक दिया।
कोर्ट ने ओबीसी आयोग पर सवाल उठाए
न्यायालय ने ओबीसी (राजनीतिक) आयोग के सचिव अशोक जैन से देरी के संबंध में तीखे सवाल किए, यह देखते हुए कि आयोग का गठन मई 2025 में केवल तीन महीने के लिए किया गया था। इसने इस बात पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि तीन महीने के लिए निर्धारित कार्य को एक वर्ष से अधिक समय लग गया है। न्यायालय ने यह भी सवाल किया कि ओबीसी आयोग ने अपनी रिपोर्ट के लिए 14 अगस्त की नई तारीख कैसे तय की, जबकि न्यायालय ने 31 जुलाई की चुनाव समय सीमा निर्धारित की थी।
स्थानीय शासन पर प्रभाव
राजस्थान में लगभग 14,000 ग्राम पंचायतें और 300 से अधिक नगरीय निकाय कई महीनों से निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना काम कर रहे हैं। चुनावों में इस लंबी देरी ने स्थानीय विकास कार्यों और शासन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अदालत ने कहा कि ग्राम पंचायत चुनावों को पूरा करने में लगभग 50 दिन और नगरीय निकाय चुनावों में लगभग 40 दिन लगेंगे।
20 जुलाई को अहम सुनवाई
अगली निर्णायक सुनवाई सोमवार, 20 जुलाई, 2026 को निर्धारित है। इस तारीख को इस मामले से संबंधित सभी मूल याचिकाओं और सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय के आक्रामक रुख को देखते हुए इस सुनवाई से राजस्थान में स्थानीय चुनावों का अंतिम भविष्य तय होने की उम्मीद है।
क्यों मायने रखता है
उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप स्थानीय स्तर पर समय पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना है। इस देरी ने 14,000 ग्राम पंचायतों और 300 शहरी निकायों को प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय विकास कार्य बाधित हुए हैं। यह फैसला देशव्यापी चुनावी देरी में न्यायिक हस्तक्षेप के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
मुख्य तथ्य
- •Deadline for election roadmap: July 20, 2026
- •Bodies affected by delay: 14,000 Gram Panchayats, 300+ Urban Local Bodies
- •Previous election deadline: July 31, 2026
- •OBC Commission formation duration: 3 months (formed May 2025)
- •Next hearing date: July 20, 2026
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…