राजस्थान हाईकोर्ट: रामगढ़ बांध का पानी रोक रहे होटलों-रिसॉर्ट्स के नाम बताएं
राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध में पानी के बहाव को बाधित करने वाले अतिक्रमणों को हटाने में अधिकारियों की निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने होटलों, रिसॉर्ट्स और विश्वविद्यालयों सहित प्रभावशाली व्यक्तियों की पहचान करने की मांग की, जो बांध के जल स्रोतों को बाधित कर रहे हैं। कोर्ट ने अतिक्रमणों और एनीकटों को हटाने और दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें बांध और उसकी सहायक नदियों को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने पर जोर दिया गया। यह निर्देश एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर 15 साल पहले दायर एक जनहित याचिका पर आया है।
AI सारांश
3 bulletsरामगढ़ बांध पर कोर्ट ने निष्क्रियता पर जताई नाराजगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में अधिकारियों की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। 15 साल पुरानी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कई बैठकों के बावजूद ठोस प्रगति की कमी पर सवाल उठाया और कटाक्ष करते हुए कहा कि अधिकारी केवल बैठकों में "चाय-बिस्किट" खाते हैं। कोर्ट ने लंबी चर्चाओं पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों की पहचान करें
उच्च न्यायालय का एक प्रमुख निर्देश बांध के जल प्रवाह को बाधित करने वाले सभी प्रभावशाली व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करना और उनके नाम बताना था। इसमें जलग्रहण क्षेत्र में स्थित होटल, रिसॉर्ट, फार्महाउस और विश्वविद्यालयों के मालिक शामिल हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कोई व्यक्ति या संस्था कितनी भी प्रभावशाली क्यों न हो, प्रगति रिपोर्ट में उनके नाम का खुलासा किया जाना चाहिए।
बाधाएं हटाकर रिपोर्ट पेश करें
कोर्ट ने रामगढ़ बांध में पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने वाले सभी अतिक्रमणों और एनीकटों को हटाने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए। अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, जिसमें की गई कार्रवाइयों का विवरण हो। इस निर्देश में बाणगंगा, ताला, रोड़ा और माधोवेणी जैसी सहायक नदियों को उनके मूल, अबाधित स्थिति में बहाल करना भी शामिल है।
अवैध भूजल दोहन पर निगरानी
जलग्रहण क्षेत्र में भूजल निष्कर्षण के लिए सबमर्सिबल पंपों के अवैध उपयोग के बारे में चिंताएं उठाई गईं, जिससे बांध के लिए पानी की कमी की समस्या और बढ़ जाती है। उच्च न्यायालय ने ऐसी अनधिकृत गतिविधियों को तुरंत रोकने का आदेश दिया। सरकार ने भौतिक निरीक्षण में पक्षपात के आरोपों से बचने के लिए सर्वेक्षण के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा।
पिछली कार्रवाइयां और कोर्ट की असंतोष
अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत एक हलफनामे में बताया गया कि बहाव क्षेत्र में अवैध आवंटन से संबंधित 625 संदर्भों में से 404 का निपटारा किया जा चुका है, और भूमि राज्य सरकार के नाम दर्ज की जा चुकी है। इसके बावजूद, कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया और अगली सुनवाई में अधिक व्यापक हलफनामा की मांग की। कोर्ट यह जानना चाहता है कि कौन से अतिक्रमण हटाए गए और किसके द्वारा हटाए गए।
क्यों मायने रखता है
रामगढ़ बांध जयपुर के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, और प्रभावशाली संस्थाओं द्वारा इसका अवरोध पर्यावरण शोषण और कानून के शासन के बारे में चिंताओं को उजागर करता है। उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है, जो इसी तरह के पर्यावरण संरक्षण मामलों के लिए एक मिसाल कायम करता है।
मुख्य तथ्य
- •Court directive: Rajasthan High Court ordered identification of encroachers and removal of obstructions.
- •Entities mentioned: Hotels, resorts, universities, farmhouses.
- •Deadline: Two weeks for progress report.
- •Case origin: 15-year-old suo motu PIL based on a newspaper report.
- •Next hearing: August 13.
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