राजस्थान: मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और कन्या महाविद्यालयों के बदले नाम
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने राज्य भर के कई सरकारी कॉलेजों, सैटेलाइट अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का नाम बदलने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उपसमिति द्वारा लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक शख्सियतों, शहीदों और दानदाताओं को सम्मानित करने के लिए है। भविष्य में, व्यक्तियों या ट्रस्टों से महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान प्राप्त करने वाले संस्थानों में "राजकीय" शब्द के बाद दानदाता का नाम जोड़ा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य राजस्थान में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के लिए परोपकारी योगदान को और अधिक प्रोत्साहित करना है। प्रमुख परिवर्तनों में हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज का नाम अब शहीद मेजर विकास भाम्भू और पाली मेडिकल कॉलेज का नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा गया है।
AI सारांश
3 bulletsमंत्रिमंडलीय उपसमिति ने नाम बदलने को दी मंजूरी
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने कई सरकारी संस्थानों का नाम बदलने को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय जयपुर स्थित सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें इन प्रतिष्ठानों के लिए अधिक सम्मानजनक और मानद पहचान की दिशा में एक कदम पर जोर दिया गया। इस पहल का उद्देश्य नामों को राज्य के समृद्ध इतिहास के साथ जोड़ना और महत्वपूर्ण योगदानों को स्वीकार करना है।
मेडिकल कॉलेजों के लिए नए नाम
राजस्थान भर के कई मेडिकल कॉलेजों को प्रमुख हस्तियों के सम्मान में नए नाम मिले हैं। हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज का नाम अब शहीद मेजर विकास भाम्भू के नाम पर रखा गया है, जबकि श्रीगंगानगर मेडिकल कॉलेज का नाम महाराजा गंगा सिंह मेडिकल कॉलेज कर दिया गया है। पाली मेडिकल कॉलेज अब महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाएगा, और अलवर मेडिकल कॉलेज को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज का नाम दिया गया है।
अस्पतालों और कन्या महाविद्यालयों का भी नाम बदला गया
मेडिकल कॉलेजों के अलावा, क्षेत्रीय अस्पतालों और जिला-स्तरीय कन्या महाविद्यालयों के नामों में भी दानदाताओं और विचारकों के सम्मान में परिवर्तन किए गए हैं। अजमेर के कोटड़ा स्थित सैटेलाइट अस्पताल का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय सैटेलाइट अस्पताल कर दिया गया है। बारां के छबड़ा स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय का नाम अब श्रीमती चंद्रकांता कस्तूरचंद स्वर्णकार के नाम पर रखा गया है, जो योगदान देने वाले दानदाता परिवार को स्वीकार करता है।
नई दानदाता सम्मान नीति
राजस्थान सरकार ने व्यक्तियों, ट्रस्टों या सामाजिक संगठनों से महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान को मान्यता देने के लिए एक नई नीति शुरू की है। इसके तहत, यदि कोई दानदाता किसी सरकारी संस्थान के निर्माण या विकास में योगदान देता है, तो उनका नाम आधिकारिक नाम में 'राजकीय' शब्द के तुरंत बाद जोड़ा जाएगा। इस नीति का उद्देश्य शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए अधिक परोपकारी भागीदारी को प्रेरित करना है।
सरकारी अधिकारी उपस्थित
सचिवालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, विद्यालय शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी शामिल थे। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी प्रस्तावों पर चर्चा और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए उपस्थित थे।
क्यों मायने रखता है
यह निर्णय राजस्थान में कई शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों की पहचान और मान्यता को प्रभावित करता है, जो ऐतिहासिक स्मरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्राथमिकता देने वाली एक नई नीतिगत दिशा को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- •Chaired By: Deputy CM Dr. Premchand Bairwa
- •Institutions Affected: Government colleges, satellite hospitals, medical colleges
- •Honorees: Historical figures, martyrs, freedom fighters, donors
- •Major Name Changes: Hanuman Garh Medical College, Pali Medical College, Alwar Medical College, Sri Ganganagar Medical College, Ajmer Satellite Hospital, Baran Girls College
- •Donor Recognition Policy: Donor's name to follow 'Rajkiya' for future contributions
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