सोनम वांगचुक हटाए जाने के खिलाफ SC में PIL
पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर 21वें दिन की भूख हड़ताल से दिल्ली पुलिस ने हटा दिया था। अब वकील नरेंद्र मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इसे जनहित याचिका (PIL) के तौर पर तत्काल सुनवाई की मांग की है। याचिका में नीट अनियमितताओं, पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की गई है। वांगचुक इन्हीं मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, भारत की शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में व्यवस्थागत सुधारों की वकालत कर रहे थे। याचिका में वांगचुक को चिकित्सा सुविधाओं के साथ अपना विरोध फिर से शुरू करने की अनुमति मांगी गई है।
AI सारांश
3 bulletsसुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर 21 दिनों की भूख हड़ताल से हटाए जाने के बाद अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में मानने का अनुरोध किया है।
याचिका के आधार
याचिका में वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है। इसमें NEET में अनियमितताओं, बार-बार होने वाले पेपर लीक और सरकारी भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी प्रकाश डाला गया है।
वांगचुक का प्रदर्शन और मांगें
सोनम वांगचुक लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले इन व्यवस्थागत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे थे। याचिका के अनुसार, उन्हें विरोध स्थल से हटाए जाने से आंदोलन अपने मुख्य चेहरे के बिना रह गया।
संवैधानिक अधिकारों का दावा
याचिकाकर्ता ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने वाले अनुच्छेद 19 और जीवन एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा की गारंटी देने वाले अनुच्छेद 21 का हवाला दिया है। भूख हड़ताल के दौरान पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की कमी के बारे में चिंताएं उठाई गईं, जिससे स्वास्थ्य बिगड़ने पर जान का खतरा पैदा हो सकता है।
न्यायालय से मांगी गई राहत
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रखने की अनुमति देने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। इसमें यह भी अनुरोध किया गया है कि विरोध स्थल पर डॉक्टर, दवाएं और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्थाएं प्रदान की जाएं, और अनावश्यक सख्ती से बचा जाए।
तत्काल रिहाई और वापसी की मांग
इसके अलावा, याचिका में वांगचुक की तत्काल रिहाई और विरोध स्थल पर वापसी की मांग की गई है, यदि वह किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं पाए जाते हैं। यह महत्वपूर्ण शैक्षिक सुधारों के लिए अपनी वकालत जारी रखने के उनके अधिकार को बहाल करने का प्रयास करता है।
क्यों मायने रखता है
एक प्रमुख कार्यकर्ता को शांतिपूर्ण विरोध स्थल से हटाना मौलिक अधिकारों, विशेषकर अभिव्यक्ति और सभा के बारे में सवाल उठाता है। इसके अतिरिक्त, सोनम वांगचुक जिन व्यापक मुद्दों को उजागर कर रहे थे, जैसे परीक्षा की अखंडता, वे देश भर के लाखों छात्रों को सीधे प्रभावित करते हैं।
मुख्य तथ्य
- •Activist: Sonam Wangchuk
- •Location: Jantar Mantar, New Delhi
- •Protest Duration (before removal): 21 days of hunger strike
- •Petitioner: Advocate Narendra Mishra
- •Issues Highlighted: NEET irregularities, paper leaks, exam transparency, fundamental rights
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