1993 बोबाजार ब्लास्ट के दोषी की रिहाई के खिलाफ बंगाल SC पहुंचा
पश्चिमी बंगाल ने 1993 के बोबाजार ब्लास्ट मामले में आजीवन कारावास काट चुके रशीद खान की समयपूर्व रिहाई के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस ब्लास्ट में कोलकाता में 69 लोग मारे गए थे। राज्य ने तर्क दिया कि खान, जिसे मास्टरमाइंड माना जाता है, को अपराध की गंभीरता और राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (SSRB) द्वारा बार-बार उसकी छूट की याचिकाओं को खारिज किए जाने के मद्देनजर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 5 जून को फैसला सुनाया कि उसकी लगभग 30 साल की कारावास, जिसमें छूट भी शामिल है, ने दंड के उद्देश्यों को पूरा किया और सुधारात्मक दृष्टिकोण पर जोर दिया। 77 वर्षीय खान ने अपनी याचिका में बढ़ती उम्र और चिकित्सकीय स्थितियों का हवाला दिया था।
AI सारांश
3 bulletsबंगाल ने जल्द रिहाई के आदेश को चुनौती दी
पश्चिम बंगाल सरकार ने 1993 के विनाशकारी बोबाजार ब्लास्ट के दोषी रशीद खान की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर दी है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में एक तत्काल याचिका दायर की है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है जिसने खान की रिहाई को मंजूरी दे दी थी। यह कदम ऐसे गंभीर अपराध के लिए न्याय बनाए रखने पर राज्य के कड़े रुख को रेखांकित करता है।
ब्लास्ट का विवरण और खान की सजा
16 मार्च, 1993 को कोलकाता के घनी आबादी वाले इलाके में हुए 1993 के बोबाजार ब्लास्ट में 69 लोगों की दुखद मौत हो गई थी। रशीद खान को 31 अगस्त, 2001 को भारतीय दंड संहिता, विस्फोटक अधिनियम और आतंकवादी तथा विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) सहित गंभीर आरोपों के तहत दोषी ठहराया गया था। वह 1993 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से लगातार हिरासत में है।
दिल्ली HC का सुधारात्मक रुख
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने 5 जून के फैसले में खान की समयपूर्व रिहाई का निर्देश दिया, जिसमें दंड के लिए एक सुधारात्मक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि खान की लगभग 30 साल की कैद, जिसमें छूट भी शामिल है, दंड और निवारण के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा छूट से इनकार करने के बाद के निर्णय नए साक्ष्य पर आधारित नहीं थे।
राज्य का विरोध और खान की याचिका
पश्चिम बंगाल ने खान की रिहाई का कड़ा विरोध किया, उसे ब्लास्ट का 'मास्टरमाइंड' बताया और अपराध की गंभीर प्रकृति का हवाला दिया। इसके विपरीत, रशीद खान, जो अब 77 वर्ष के हैं, ने अपनी बढ़ती उम्र, विभिन्न चिकित्सकीय स्थितियों और 33 साल से अधिक समय से हिरासत में रहने के आधार पर छूट मांगी। उन्होंने 2014 में एक सह-दोषी की समयपूर्व रिहाई का भी उल्लेख किया।
सुप्रीम कोर्ट का विचार
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मामले की तत्काल सुनवाई के अनुरोध पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश ने खान द्वारा पहले ही काटी गई कैद की अवधि के बारे में पूछताछ की है। राज्य के वकील ने पुष्टि की कि खान ने लगभग 30 साल जेल में बिताए थे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय, दंड और पुनर्वास के सिद्धांतों को संतुलित करने में महत्वपूर्ण होगा।
क्यों मायने रखता है
यह कानूनी लड़ाई पीड़ितों के लिए न्याय, कारावास की सुधारात्मक क्षमता और एक दोषी के समयपूर्व रिहाई के अधिकार के बीच जटिल अंतःक्रिया को उजागर करती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे ही मामलों के लिए एक मिसाल कायम करेगा।
मुख्य तथ्य
- •Case: 1993 Bowbazar Blast case
- •Convict: Rashid Khan
- •Victims: 69 dead in Kolkata
- •Incarceration Period: Nearly 30 years
- •Delhi High Court Order Date: June 5, 2026
- •West Bengal's Appeal Date: June 18, 2026
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