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WMO: भीषण अल नीनो से बढ़ेगा अत्यधिक मौसम का खतरा

Briovo· 04 Jul 2026, 06:44 am IST
WMO: भीषण अल नीनो से बढ़ेगा अत्यधिक मौसम का खतरा

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो के मजबूत होने की चेतावनी जारी की है, जिससे वैश्विक मौसम में गंभीर बदलाव आने की आशंका है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया के कई हिस्सों में भीषण लू, सूखा, भारी बारिश और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। WMO ने जुलाई से सितंबर के दौरान अल नीनो के बेहद मजबूत रूप में विकसित होने की प्रबल संभावना जताई है। भारत पहले ही इसके प्रभाव महसूस कर चुका है, जून में 40% कम बारिश हुई, खासकर मध्य भारत में, और जुलाई में भी औसत से कम बारिश का अनुमान है।

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वैश्विक मौसम चेतावनी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियों के मजबूत होने के संबंध में एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस घटना से वैश्विक मौसम पैटर्न में व्यापक बदलाव आने और दुनिया भर में चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है।

अल नीनो की अपेक्षित तीव्रता

WMO की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जुलाई से सितंबर के दौरान अल नीनो के बेहद मजबूत रूप में विकसित होने की प्रबल संभावना है। WMO की महानिदेशक सेलेस्ट साउलो ने बताया कि अल नीनो शुरू हो चुका है और तेजी से शक्तिशाली रूप ले रहा है, जिससे सूखा, भारी बारिश और भीषण लू जैसे खतरे बढ़ जाएंगे।

चरम मौसम के परिणाम

मजबूत हो रहा अल नीनो विश्व स्तर पर विभिन्न चरम मौसमी परिस्थितियों के खतरों को बढ़ाएगा। इसमें स्थलीय क्षेत्रों में भीषण लू, समुद्री हीटवेव, लंबे समय तक सूखा और मूसलाधार बारिश की घटनाएं शामिल हैं, जो समुदायों और पारिस्थितिक तंत्रों के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करेंगी।

भारत के मानसून पर प्रभाव

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 जून को अल नीनो के आगमन की घोषणा करते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इसके और मजबूत होने का अनुमान लगाया था। जून में इसका प्रभाव स्पष्ट था, देश भर में 40% बारिश कम हुई, जिसमें मध्य भारत सर्वाधिक प्रभावित रहा जहां 50.4% कमी दर्ज की गई। आईएमडी ने जुलाई के लिए भी औसत से कम बारिश की आशंका जताई है।

क्यों मायने रखता है

एक मजबूत अल नीनो घटना का वैश्विक मौसम पैटर्न पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, जिससे जलवायु संबंधी आपदाएं बढ़ सकती हैं और दुनिया भर में कृषि, जल संसाधनों और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

मुख्य तथ्य

  • Organization issuing warning: World Meteorological Organization (WMO)
  • El Niño strengthening period: July to September
  • Impact on India in June: 40% rainfall deficit
  • Most affected Indian region in June: Central India (50.4% deficit)

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