पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से रेप के दोषी को 20 साल की सज़ा सुनाई
जयपुर की एक पॉक्सो अदालत ने अजीत सिंह उर्फ प्रदीप सिंह दरोगा को नाबालिग छात्रा के अपहरण, दुष्कर्म और ब्लैकमेल के आरोप में 20 साल जेल की सजा सुनाई है। न्यायाधीश विकास कुमार खंडेलवाल की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया, जिसमें दोषी के खिलाफ 2020 और 2021 में भी नाबालिगों के साथ ऐसे ही मामलों का उल्लेख किया गया। बचाव पक्ष ने टूटी हुई सगाई और डीएनए पुष्टि की कमी का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने पीड़िता के बयान को विश्वसनीय माना। न्यायाधीश ने जोर दिया कि विश्वसनीय पीड़िता का बयान डीएनए रिपोर्ट की पुष्टि न होने से कमजोर नहीं होता, और समाज में गलत संदेश न जाए, इसलिए कोई नरमी नहीं बरती गई।
AI सारांश
3 bulletsकोर्ट ने सुनाया फैसला
जयपुर महानगर द्वितीय की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए अजीत सिंह उर्फ प्रदीप सिंह दरोगा को 20 साल जेल की सजा सुनाई है। यह सजा नाबालिग छात्रा के अपहरण, दुष्कर्म और ब्लैकमेल जैसे जघन्य अपराधों के लिए दी गई है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराधों पर न्यायपालिका के कड़े रुख को रेखांकित करता है।
अपराध का विवरण
पीड़िता के पिता ने 19 नवंबर 2022 को करधनी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि आरोपी ने मई-जून 2022 में उनकी बेटी का अपहरण कर उसे बिंदायका के एक होटल में ले जाकर दुष्कर्म किया और उसका अश्लील वीडियो बना लिया था। इसके बाद आरोपी इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर नाबालिग को लगातार ब्लैकमेल कर रहा था।
कोर्ट ने पीड़िता के बयान को माना विश्वसनीय
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता की बड़ी बहन से अभियुक्त की सगाई टूटने के कारण उसे झूठा फंसाया गया था और डीएनए/एफएसएल रिपोर्ट से अपराध की पुष्टि नहीं होती। हालांकि, न्यायाधीश विकास कुमार खंडेलवाल ने फैसला सुनाया कि यदि पीड़िता का बयान विश्वसनीय है, तो केवल डीएनए पुष्टि की अनुपस्थिति से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होता। यह निर्णय ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित के बयानों को दिए जाने वाले महत्व पर जोर देता है।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपी अजीत सिंह के खिलाफ करधनी थाने में 2020 और 2021 में भी अन्य नाबालिग बच्चियों से बलात्कार के मामले दर्ज थे। उन मामलों में उसे पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था और सजा सुनाई गई थी। समान अपराधों के इस इतिहास ने अदालत के फैसले को प्रभावित किया, जिससे वर्तमान सजा में कोई नरमी नहीं बरती गई।
समाज को संदेश
अपने फैसले में, अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसके प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति समाज में गलत संदेश देगी। यह कड़ा रुख नाबालिगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने और बार-बार अपराध करने वालों को कमजोर व्यक्तियों के खिलाफ और अपराध करने से रोकने के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
क्यों मायने रखता है
यह फैसला पॉक्सो मामलों में पीड़ित के बयान के महत्व को पुष्ट करता है, खासकर जब भौतिक साक्ष्य निर्णायक न हों। यह नाबालिगों की सुरक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता और बार-बार अपराध करने वालों के खिलाफ एक कड़ा संदेश देता है, यह दर्शाता है कि पिछली सजाएँ समाज को और नुकसान पहुँचाने से रोकने के लिए दंड को प्रभावित करती हैं।
मुख्य तथ्य
- •Convicted: Ajit Singh alias Pradeep Singh Daroga
- •Sentence: 20 years in prison
- •Charges: Kidnapping, rape, and blackmail of a minor
- •Court: POCSO Court-1, Jaipur Metropolitan II
- •Judge: Vikas Kumar Khandelwal
- •Prior Cases: Similar cases against minors in 2020 and 2021
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