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महाराष्ट्र मॉनसून में देरी; 24 जून के बाद बारिश की संभावना

Briovo· 18 Jun 2026, 04:03 pm IST1
महाराष्ट्र मॉनसून में देरी; 24 जून के बाद बारिश की संभावना

महाराष्ट्र में मॉनसून की प्रगति में देरी हो रही है, जिसका मुख्य कारण अरब सागर से आने वाली हवाओं का कमजोर पड़ना, क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो में कमी और प्रतिकूल मौसमी पैटर्न है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 8 जून को दक्षिण कोंकण और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसकी प्रगति रुक गई है। मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण मजबूत नम हवाएं और सहायक दबाव प्रणालियाँ वर्तमान में अनुपस्थित हैं। हालांकि, IMD ने 24-25 जून के आसपास, विशेष रूप से कोंकण क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में वृद्धि की संभावना जताई है। विभाग, मॉनसून की आगे की प्रगति के लिए मौसम की स्थितियों पर लगातार नजर रख रहा है।

AI सारांश

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महाराष्ट्र में मॉनसून की धीमी गति

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया है कि महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति रुक गई है। 8 जून के आसपास दक्षिण कोंकण और दक्षिण मध्य महाराष्ट्र में आगे बढ़ने के बाद, इसकी गति धीमी हो गई है। इस देरी का कारण कई प्रतिकूल वायुमंडलीय कारक हैं।

कमजोर पड़ने वाली हवाएं और प्रवाह

मॉनसून की सुस्ती का एक मुख्य कारण अरब सागर से आने वाली मजबूत नम हवाओं का कमजोर पड़ना है। इसके अतिरिक्त, पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर के ऊपर क्रॉस-इक्वेटोरियल प्रवाह, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए नमी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, वह भी काफी कम हो गया है। ये कारक सामूहिक रूप से महाराष्ट्र में नमी के प्रवेश को कम कर रहे हैं।

सहायक मौसम प्रणालियों का अभाव

IMD ने उन महत्वपूर्ण मौसम प्रणालियों की अनुपस्थिति पर प्रकाश डाला है जो सामान्यतः मॉनसून की प्रगति में सहायता करती हैं। इनमें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव वाले क्षेत्र या चक्रवाती परिसंचरण, और पश्चिमी तट के साथ पर्याप्त तीव्रता वाली अपतटीय द्रोणिका शामिल हैं। इसके अलावा, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) जैसे बड़े पैमाने पर हवा के परिसंचरण पैटर्न भी वर्तमान में क्षेत्र में मॉनसून की प्रगति के लिए अनुकूल नहीं हैं।

24 जून के बाद बारिश की उम्मीद

वर्तमान धीमी गति के बावजूद, IMD ने मौसम के पैटर्न में बदलाव की भविष्यवाणी की है। संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान से पता चलता है कि 24-25 जून के आसपास, विशेष रूप से कोंकण क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में वृद्धि होगी। तब तक, राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले चार से पांच दिनों तक छिटपुट बारिश होने की संभावना है।

IMD द्वारा निरंतर निगरानी

भारत मौसम विज्ञान विभाग आश्वस्त करता है कि वह सिनॉप्टिक परिस्थितियों की लगातार निगरानी कर रहा है। इस निगरानी का उद्देश्य मौसम के पैटर्न में किसी भी बदलाव का पता लगाना है जो पूरे महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की आगे की प्रगति को सुविधाजनक बना सके। नई जानकारी उपलब्ध होने पर अपडेट दिए जाएंगे।

क्यों मायने रखता है

मॉनसून में देरी से महाराष्ट्र की कृषि, जल संसाधन और समग्र अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। अनियमित बारिश से फसलें खराब हो सकती हैं और पानी की कमी हो सकती है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होंगे।

मुख्य तथ्य

  • Monsoon Reached: June 8, South Konkan & South Central Maharashtra
  • Expected Rain Increase: Around June 24-25
  • Affected Area: Maharashtra
  • Cause of Delay: Weakened Arabian Sea winds, reduced cross-equatorial flow, lack of supporting weather systems
  • Forecast Agency: India Meteorological Department (IMD)

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