ऋतब्रत बनर्जी गुट का TMC भवन पर कब्जा
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ऋतब्रत बनर्जी गुट ने कोलकाता स्थित तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया है, इसे अपना आधिकारिक मुख्यालय घोषित किया है। यह कदम गुट द्वारा अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष चुने जाने और लगभग 65 विधायकों का समर्थन होने का दावा करने के बाद आया है। विद्रोही समूह ने ताले बदले, नए बैनर लगाए और पार्टी कार्यालय के भीतर एक बैठक की। यह घटना चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के बाद हुई है, जिससे टीएमसी के भीतर आंतरिक कलह और तेज हो गई है। ममता बनर्जी गुट के समर्थकों को बंद मुख्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया।
AI सारांश
3 bulletsविद्रोही गुट ने TMC मुख्यालय पर कब्जा किया
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गुट ने कोलकाता स्थित तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया है। विद्रोही नेताओं ने, कई विधायकों के साथ, मुख्य द्वार के ताले बदल दिए और नए बैनर लगाए, जिसमें इमारत को अपना आधिकारिक मुख्यालय घोषित किया गया। यह कदम ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी की संपत्तियों पर उनके नियंत्रण के लिए एक सीधी चुनौती को दर्शाता है।
अरूप रॉय विद्रोहियों द्वारा पार्टी अध्यक्ष घोषित
अधिग्रहण के दौरान, विद्रोही गुट ने मुख्य द्वार पर एक पोस्टर लगाया, जिसमें वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष घोषित किया गया। यह घोषणा विद्रोही नेताओं द्वारा पहले एक विशेष सत्र आयोजित कर रॉय को अपना पार्टी अध्यक्ष चुनने के बाद आई है, जो टीएमसी के भीतर एक समानांतर संगठनात्मक संरचना का संकेत है।
विवाद के बीच चुनाव आयोग की संलिप्तता
अधिग्रहण से पहले, ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगियों ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की थी। उन्होंने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न, संगठनात्मक ढांचे और संपत्तियों पर अपने दावे प्रस्तुत किए। चुनाव आयोग ने तब से दोनों गुटों को नोटिस जारी किए हैं, जिसमें उन्हें 6 जुलाई तक प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता है, जो पार्टी नियंत्रण के लिए बढ़ते कानूनी झगड़े को उजागर करता है।
ममता गुट की प्रतिक्रिया और आरोप
ममता बनर्जी गुट के समर्थक, जिनमें कुछ तृणमूल विधायक भी शामिल थे, मुख्यालय पहुंचे तो उन्हें गेट बंद मिला, जिससे उन्हें प्रवेश नहीं मिल पाया। वरिष्ठ तृणमूल नेता कुणाल घोष ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और विद्रोहियों को 'कठपुतली' करार दिया, जिसमें बाहरी प्रभाव का सुझाव दिया गया। ममता गुट ने यह भी आरोप लगाया कि अधिग्रहण को राज्य प्रशासन और पुलिस का मौन समर्थन प्राप्त था, हालांकि विद्रोही समूह ने इन दावों को खारिज कर दिया।
व्यापक विद्रोही समर्थन का दावा
विद्रोही गुट का दावा है कि उसने महत्वपूर्ण समर्थन हासिल किया है, यह दावा करते हुए कि 80 में से लगभग 65 विधायक अब उनका समर्थन कर रहे हैं। यह दावा पहले की एक घटना के बाद आया है जहां 58 विधायकों ने आधिकारिक पार्टी उम्मीदवार को अस्वीकार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता पद के लिए समर्थन दिया था। इसके अतिरिक्त, रिपोर्टें बताती हैं कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से लगभग 20 राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में चले गए हैं और एनडीए के साथ जुड़ गए हैं।
क्यों मायने रखता है
यह अधिग्रहण तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष में एक बड़ी वृद्धि का प्रतीक है, जिससे संभावित रूप से औपचारिक विभाजन और पश्चिम बंगाल के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। चुनाव आयोग भी इसमें शामिल है, जो इस पार्टी विवाद में कानूनी आयाम जोड़ रहा है।
मुख्य तथ्य
- •Location: Trinamool Bhawan, Kolkata
- •Date of Takeover: Friday (not specified exact date, but article published July 3, 2026)
- •Faction Leader: Ritrabrata Banerjee
- •New Party President (Rebel Faction): Arup Roy
- •MLA Support Claim: Approx. 65 MLAs
- •Election Commission Involvement: Met full bench, notice issued until July 6 for documents
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