पोकरण में मानसून की बेरुखी से पशुधन भुखमरी का शिकार
राजस्थान के पोकरण में पशुधन भूख, प्यास और बीमारी से दम तोड़ रहा है। मानसून की बेरुखी के कारण जून में बारिश नहीं हुई और जुलाई के मध्य तक भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, जिससे चारागाह सूख गए हैं और जल स्रोत खाली पड़े हैं। बेसहारा पशु कचरा और प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन, पशुपालन विभाग और जन प्रतिनिधियों से चारा डिपो स्थापित करने और उचित पशु चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था अप्रभावी साबित हो रही है।
AI सारांश
3 bulletsपोकरण में मानसून की विफलता से तबाही
राजस्थान के पोकरण में मानसून की पूर्ण विफलता के कारण इस समय गंभीर स्थिति बनी हुई है। जून बिना किसी बारिश के बीत गया, और जुलाई के मध्य तक भी अपर्याप्त वर्षा हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में सूखे की स्थिति बन गई है।
सूखे के बीच पशुधन भुखमरी का शिकार
बारिश की कमी के कारण चारागाह सूख गए हैं और तालाब खाली पड़े हैं, जिससे आवारा पशुओं को पर्याप्त भोजन या पानी नहीं मिल पा रहा है। भूख और प्यास के कारण कई पशु, विशेषकर गायें, कमजोर होकर कंकाल मात्र रह गई हैं।
दूषित चारे से फैल रही बीमारियाँ
भूख से मजबूर होकर, कई जानवर सड़कों के किनारे और खुले मैदानों में पड़े कचरे और प्लास्टिक सामग्री का सेवन कर रहे हैं। इस दूषित आहार के कारण वे विभिन्न गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, जिससे उनका पहले से ही नाजुक स्वास्थ्य और बिगड़ रहा है।
अपर्याप्त पशु चिकित्सा सहायता
ग्रामीणों का कहना है कि संकटग्रस्त पशुओं के संरक्षण और उपचार के लिए प्रभावी व्यवस्था का गंभीर अभाव है। पशु चिकित्सा दल नियमित रूप से प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे चित्तोड़ी, बारट का गांव और मेडवा जैसे क्षेत्रों में बीमार और मरते हुए पशुओं को आवश्यक चिकित्सा देखभाल नहीं मिल पा रही है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय समुदाय प्रशासन, पशुपालन विभाग और जन प्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील कर रहा है। वे पशुधन के और नुकसान को रोकने के लिए सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो स्थापित करने और पशु चिकित्सा सेवाओं में सुधार करने की तत्काल मांग कर रहे हैं।
क्यों मायने रखता है
पोकरण में मानसून की गंभीर विफलता से एक बड़ा पारिस्थितिक और मानवीय संकट उत्पन्न हो रहा है, जिससे पशुधन का जीवन और उन पर निर्भर ग्रामीण समुदायों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
मुख्य तथ्य
- •Location: Pokhran, Jaisalmer, Rajasthan
- •Cause of Crisis: Monsoon failure, leading to drought conditions
- •Affected: Livestock (cows, other animals)
- •Consequences: Hunger, thirst, disease, death of animals
- •Villager Demands: Fodder depots, veterinary care, administrative intervention
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