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लखनऊ आग: अवैध निर्माण की जांच

Briovo· 24 Jun 2026, 04:39 pm IST
लखनऊ आग: अवैध निर्माण की जांच

लखनऊ में एक भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई, जिससे एक इमारत के पिछले अवैध निर्माण और विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर सवाल उठ गए हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि 2016 में इमारत के अवैध निर्माण के लिए एक विध्वंस आदेश दो महीने के भीतर रद्द कर दिया गया था। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शुरू में 1980 में आवासीय उपयोग के लिए संपत्ति आवंटित की थी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस घटना की समय-बद्ध जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है और उसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

AI सारांश

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भीषण आग ने उठाए सवाल

लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून, 2026 को लगी एक दुखद आग में 15 लोगों की जान चली गई। इस विनाशकारी घटना ने प्रभावित इमारत के संबंध में स्थानीय विकास प्राधिकरण की पिछली कार्रवाइयों को जांच के दायरे में ला दिया है, खासकर अवैध निर्माण को लेकर। इस घटना ने इमारत की सुरक्षा और नियामक अनुपालन के बारे में व्यापक चिंताएं पैदा की हैं।

रद्द विध्वंस आदेश की जांच

रिकॉर्ड बताते हैं कि अलीगंज योजना के सेक्टर डी में स्थित इमारत के खिलाफ 10 मई, 2016 को अवैध निर्माण के कारण विध्वंस आदेश जारी किया गया था। हालांकि, यह महत्वपूर्ण आदेश रहस्यमय तरीके से सिर्फ दो महीने बाद, 5 जुलाई, 2016 को रद्द कर दिया गया था। विध्वंस आदेश का यह त्वरित रद्द होना अब चल रही जांच का एक प्रमुख बिंदु है।

इमारत का इतिहास और स्वामित्व

एमएस/102/डी नंबर वाली यह संपत्ति मूल रूप से 1980 में एक हायर-परचेज योजना के तहत आवंटित की गई थी। कई स्वामित्व परिवर्तनों के बाद, इसे 2014 में वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला के नाम पर पंजीकृत किया गया था। लगभग 1,992 वर्ग फुट की संपत्ति के लिए आवासीय उपयोग भवन योजना को अगस्त 2014 में स्व-प्रमाणीकरण योजना के तहत अनुमोदित किया गया था।

पुलिस कार्रवाई और एसआईटी का गठन

घटना के बाद, भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया है। इस टीम में अमृत अभिजात और प्रवीण कुमार शामिल हैं, जिन्हें सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा गया है।

क्यों मायने रखता है

यह घटना शहरी नियोजन, नियामक निरीक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालती है। अवैध निर्माण के लिए विध्वंस आदेश को रद्द करने से अधिकारियों की जवाबदेही और संभावित लापरवाही के बारे में गंभीर सवाल उठते हैं।

मुख्य तथ्य

  • Casualties: 15 deaths
  • Incident Date: June 22, 2026
  • Demolition Order Issued: May 10, 2016
  • Demolition Order Revoked: July 5, 2016
  • Investigation Team: Two-member SIT
  • Report Deadline: Seven days

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