वांगचुक का सफदरजंग पर उत्पीड़न का आरोप, मेदांता शिफ्ट से पहले का मामला
कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी कर मेदांता में स्थानांतरण से पहले सफदरजंग अस्पताल में उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अधिकारियों ने उन्हें जाने से रोका। सफदरजंग अस्पताल ने स्पष्ट किया कि वीडियो लिखित अदालत आदेश मिलने से पहले रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें कहा गया था कि वांगचुक ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जाने पर जोर दिया था। उन्हें 21 जुलाई को मेदांता स्थानांतरित कर दिया गया और सरकारी आश्वासनों के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वांगचुक जंतर मंतर पर 28 जून से पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
AI सारांश
3 bulletsउत्पीड़न के आरोप सामने आए
कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात एक वीडियो जारी कर सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें अस्पताल से बाहर जाने से रोका गया, जिससे उन्हें मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मिली थी। वांगचुक को यह कहते हुए सुना गया, "आप मुझे परेशान कर रहे हैं... अगर मैं तनाव से मर गया, तो यह आपकी जिम्मेदारी होगी।"
अस्पताल ने वीडियो के समय पर दी सफाई
सफदरजंग अस्पताल ने स्पष्ट किया कि वांगचुक का वीडियो दिल्ली उच्च न्यायालय का लिखित आदेश मिलने से पहले रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय वांगचुक ने मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर अस्पताल छोड़ने पर जोर दिया था। अस्पताल ने यह भी जोड़ा कि लिखित आदेश मिलने के तुरंत बाद उसी दिन शाम 6:40 बजे उन्हें मेदांता गुरुग्राम के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया था।
वांगचुक की हिरासत का पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को जंतर मंतर पर एक विरोध स्थल से जबरन सफदरजंग अस्पताल स्थानांतरित कर दिया था। वह 28 जून से भूख हड़ताल पर थे, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी की पेपर लीक के लिए जवाबदेही और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांगों का समर्थन किया गया था।
मेदांता में भूख हड़ताल समाप्त
वांगचुक ने गुरुवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। यह निर्णय उनकी प्रमुख मांगों के संबंध में सरकार और विभिन्न दलों के सांसदों से मिले आश्वासनों के बाद लिया गया। उनकी पत्नी, गीतांजलि अंगमो, और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह उस समय मौजूद थे।
क्यों मायने रखता है
यह घटना कार्यकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों और अधिकारियों तथा व्यक्तियों के बीच संचार में विसंगतियों को उजागर करती है, खासकर अदालती निर्देशों और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों में।
मुख्य तथ्य
- •Activist's Name: Sonam Wangchuk
- •First Hospital from Delhi police…: Safdarjung Hospital
- •Protest Start Date: June 28
- •Hospital Shift Date: July 21
- •New Hospital: Medanta Hospital, Gurugram
- •Protest Location: Jantar Mantar
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