तमिलनाडु CM विजय के फ्लोर टेस्ट के खिलाफ याचिका SC ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के फ्लोर टेस्ट में भ्रष्टाचार और हेरफेर के आरोपों वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई थी और दावा किया गया था कि बहुमत हासिल करने के लिए रातोंरात 12 विधायकों के अवैध हस्ताक्षर लिए गए थे। शीर्ष अदालत ने आरोपों को अस्पष्ट, निराधार और ठोस सबूतों के बिना पाया, और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार और विधानसभा की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस फैसले से सीएम विजय को बड़ी राहत मिली है, जिससे उनकी सरकार पर मंडरा रहे राजनीतिक अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं।
AI सारांश
3 bulletsSC ने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नव-निर्वाचित तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के फ्लोर टेस्ट के दौरान भ्रष्टाचार और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। याचिका में हेरफेर के दावों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से व्यापक जांच की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता के निराधार दावे
कार्यवाही के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई, यह कहते हुए कि लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से
कथित 'नंबर गेम'
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सीएम विजय ने 13 मई को 144 मतों के समर्थन और 22 मतों के विरोध के साथ विश्वास मत हासिल किया, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया। आरोप लगाया गया कि सीएम विजय की पार्टी, तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके), के पास शुरुआत में केवल 108 विधायक थे और उसने बहुमत प्राप्त करने के लिए कथित भ्रष्टाचार के माध्यम से रातोंरात 12 अतिरिक्त विधायकों के हस्ताक्षर अवैध रूप से प्राप्त किए।
न्यायालय ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखा
सर्वोच्च न्यायालय ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दृढ़ता से बरकरार रखा, यह कहते हुए कि एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के मामलों और विधायी विधानसभा की कार्यवाही में न्यायिक हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं था। यह फैसला कदाचार के ठोस सबूतों के अभाव में निर्वाचित निकायों की स्वायत्तता के प्रति न्यायपालिका के सम्मान को रेखांकित करता है।
सीएम विजय के लिए राजनीतिक स्थिरता
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के लिए राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक स्थिर कर दिया है। इसने उनके प्रशासन पर मंडरा रही राजनीतिक अनिश्चितता को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया है, जिससे उनकी स्थिति और उनकी सरकार का जनादेश मजबूत हो गया है।
क्यों मायने रखता है
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सीएम विजय की सरकार और तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही की वैधता को मान्यता दी है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त हो गई है।
मुख्य तथ्य
- •Court Decision: Supreme Court dismissed the petition
- •Allegations: Corruption and manipulation in floor test, illegal signing of 12 MLAs
- •Petitioner Claims: CM Vijay had only 108 MLAs, needed 12 more for majority
- •Court Finding: Allegations were vague, baseless, and lacked evidence
- •Floor Test Date: May 13
- •CM Vijay's Votes: 144 votes in support, 22 against
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…