गढ़चिरौली पुलिस ने पूर्व नक्सलियों की नसबंदी हटवाकर परिवार बसाने में की मदद

गढ़चिरौली पुलिस के 'प्रोजेक्ट संजीवनी' ने आत्मसमर्पित 50 नक्सलियों, जिनमें कृष्णा दोरपेडी भी शामिल हैं, को अपनी नसबंदी हटवाने में मदद की है, जिससे उनमें से 14 माता-पिता बन सके हैं। नक्सलियों को जंगल में बच्चों से बचने के लिए संगठन द्वारा शादी से पहले नसबंदी कराने पर मजबूर किया जाता था। आत्मसमर्पण के बाद पूछताछ में उन्होंने परिवार शुरू करने की इच्छा व्यक्त की थी। पुलिस ने प्लास्टिक सर्जन के माध्यम से इन नसबंदी को हटाने वाली सर्जरी में सुविधा प्रदान की। 2003 में नक्सल आंदोलन में शामिल हुए और 2006 में नसबंदी करवा चुके कृष्णा दोरपेडी की 2015 में सर्जरी हटने के बाद अब दो बेटियाँ हैं, जो उन्हें मुख्यधारा के जीवन में फिर से जोड़ने में परियोजना की सफलता को उजागर करता है।
क्यों मायने रखता है
गढ़चिरौली पुलिस की यह पहल पूर्व नक्सलियों के सामाजिक और भावनात्मक पुनर्एकीकरण को संबोधित करती है, उन्हें सामान्य पारिवारिक जीवन का अवसर प्रदान करती है। यह पुनर्वास के लिए एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदर्शित करता है, जो व्यक्तिगत भलाई और समुदाय में पुनः प्रवेश पर केंद्रित है। यूपीएससी जीएस-III (आंतरिक सुरक्षा) और जीएस-II (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप) के लिए प्रासंगिक।
मुख्य तथ्य
- •Project Name: Project Sanjeevani
- •Location: Garrhchiroli
- •Number of Naxalites who underwent vasectomy reversal: 50
- •Number of Naxalites who became parents: 14
- •Year Krishna Dorpeddi joined Naxal movement: 2003
- •Year Krishna Dorpeddi's vasectomy was reversed: 2015
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