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जयराम रमेश ने निकोबार परियोजना में

Briovo· 19 Jun 2026, 12:23 pm IST
जयराम रमेश ने निकोबार परियोजना में

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के बचाव को

AI सारांश

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रमेश ने परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाए

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक बार फिर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के बचाव पर कड़ी निराशा व्यक्त की है। रमेश ने मंत्रालय पर परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण पर्यावरणीय रिपोर्टों और अध्ययनों को रोकने में "असाधारण स्तर की अपारदर्शिता" का आरोप लगाया। यह लगातार चल रहा संवाद परियोजना के पारिस्थितिक प्रभाव और नियामक निरीक्षण के बारे में लगातार चिंताओं को उजागर करता है।

एनजीटी की मंजूरी और सरकार का रुख

पर्यावरण मंत्री यादव ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की 16 फरवरी, 2026 की मंजूरी का हवाला दिया, जिसने परियोजना को "रणनीतिक महत्व" को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की अनुमति दी थी। एनजीटी ने 2022 की पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और उच्च-शक्ति समिति (एचपीसी) की रिपोर्ट को गोपनीय रखने के केंद्र के फैसले को स्वीकार कर लिया। यादव ने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना का मूल्यांकन कठोर मानकों के साथ किया गया था।

पर्यावरणीय प्रभाव और आदिवासी अधिकारों पर चिंताएँ

महत्वाकांक्षी ₹81,000 करोड़ की परियोजना में एक ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, हवाई अड्डा, बिजली संयंत्र और ग्रीनफील्ड टाउनशिप शामिल है। रमेश सहित आलोचकों का तर्क है कि परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) अपर्याप्त हैं और दिशानिर्देशों से कम हैं। इस परियोजना में लगभग दस लाख पेड़ों की कटाई और लेदरबैक कछुए के घोंसले के स्थल पर निर्माण शामिल होने की उम्मीद है, जिससे पर्यावरण और स्वदेशी शोम्पेन जनजाति के लिए गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।

रणनीतिक औचित्य में विसंगतियां

आगे की जांच से पता चला है कि वित्त मंत्रालय के एक निकाय ने अगस्त 2024 तक बंदरगाह घटक की लागत, जो ₹48,862 करोड़ अनुमानित है, को "रणनीतिक उद्देश्यों की कमी" के रूप में चिह्नित किया था। रमेश का तर्क है कि रणनीतिक औचित्य का उपयोग पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के संबंध में पारदर्शिता की कमी को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पूर्ण प्रकटीकरण किसी भी वास्तविक रणनीतिक लक्ष्यों को बाधित नहीं करेगा।

अवास्तविक शमन उपाय

रमेश ने विशेष रूप से बताया कि कुछ प्रस्तावित शमन उपाय, जैसे "कोरल कॉलोनियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण," "स्पष्ट रूप से अवास्तविक और लगभग असंभव" हैं। उन्होंने मार्च 2024 से प्रकाशित छह-मासिक अनुपालन रिपोर्टों की अनुपस्थिति और भारतीय वन्यजीव संस्थान जैसे निकायों से संरक्षण योजनाओं की अनुपलब्धता का भी उल्लेख किया। यह पारिस्थितिक संरक्षण के प्रति व्यवहार्यता और प्रतिबद्धता के बारे में सवाल उठाता है।

क्यों मायने रखता है

ग्रेट निकोबार परियोजना पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों से संबंधित एक महत्वपूर्ण विषय रही

मुख्य तथ्य

  • Project Cost (initial estimate): ₹81,000 crore
  • Project Cost (revised estimate): ₹91,000 crore (implied by YouTube video)
  • Port Component Cost: ₹48,862 crore
  • NGT Clearance Date: February 16, 2026
  • Estimated Tree Felling: Close to a million

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