मोदी-कार्नी वार्ता बाद कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर कसा शिकंजा
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष के बीच हालिया बातचीत के बाद, कनाडा ने खालिस्तान समर्थक नेटवर्कों के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इससे न केवल उनकी गतिविधियों पर असर पड़ा है, बल्कि ISI की योजनाओं को भी झटका लगा है, जिसने ऐतिहासिक रूप से भारत विरोधी अभियानों के लिए ऐसे समूहों का समर्थन किया है। 18 जुलाई से प्रभावी होने वाला एक नया नफरत-विरोधी कानून घृणास्पद भाषण और धार्मिक समुदायों को निशाना बनाने पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखता है, जिससे हिंदू मंदिरों के बाहर प्रदर्शन करने वाले खालिस्तानी समूहों के प्रभावित होने की उम्मीद है। कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां, 1985 के कनिष्क बमबारी में खालिस्तानी चरमपंथियों की भूमिका को स्वीकार करते हुए, अब इन तत्वों को कनाडा की अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान रही हैं, जिससे पंजाब में संभावित जवाबी हमलों की चिंताओं के बीच भारत में सतर्कता बढ़ गई है।
AI सारांश
3 bulletsकनाडा का खालिस्तान पर शिकंजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच हाल की चर्चाओं के बाद, कनाडा ने खालिस्तानी नेटवर्कों के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई शुरू की है। भारतीय सुरक्षा अधिकारी इन उपायों को सकारात्मक मानते हैं, जो कनाडा के रुख में उल्लेखनीय बदलाव का संकेत देते हैं। यह कार्रवाई कनाडा के भीतर संचालित खालिस्तान समर्थित समूहों की लंबे समय से चली आ रही गतिविधियों को लक्षित करती है।
नया नफरत-विरोधी कानून
कनाडाई सरकार द्वारा पारित एक नया नफरत-विरोधी कानून, जो 18 जुलाई से प्रभावी होगा, घृणास्पद भाषण और धार्मिक समुदायों को निशाना बनाने पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखता है। इस कानून का सीधा असर खालिस्तान समर्थक समूहों पर पड़ने की उम्मीद है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से हिंदू मंदिरों के बाहर प्रदर्शन किया है और भड़काऊ सामग्री प्रदर्शित की है। यह कानून कनाडाई अधिकारियों को ऐसी गतिविधियों से निपटने के लिए अधिक शक्ति प्रदान करता है।
CSIS ने स्वीकारा खालिस्तानी खतरा
कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की एक रिपोर्ट ने हाल ही में 1985 के एयर इंडिया कनिष्क फ्लाइट 182 बमबारी में खालिस्तानी चरमपंथियों की भूमिका को स्वीकार किया है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि कनाडाई खुफिया ने पहली बार खालिस्तानी तत्वों को हमले से स्पष्ट रूप से जोड़ा है। यह रिपोर्ट कनाडा के भीतर बढ़ती समझ को दर्शाती है कि ये समूह न केवल भारत के लिए बल्कि कनाडा की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।
ISI पर दबाव
कथित तौर पर, भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी नेटवर्कों के खिलाफ बढ़े सहयोग के कारण पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) असहज महसूस कर रही है। ISI का भारत विरोधी गतिविधियों के लिए खालिस्तान समर्थक संगठनों का उपयोग करने का लंबा इतिहास रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसियां बताती हैं कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) जैसे समूह, जिन्हें पंजाब में संचालन का काम सौंपा गया था, अब काफी दबाव में हैं।
भारत हाई अलर्ट पर
कनाडा में सकारात्मक घटनाक्रमों के बावजूद, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क बनी हुई हैं। ऐसी आशंकाएं हैं कि ISI के दबाव में, BKI जैसे खालिस्तानी तत्व पंजाब या पड़ोसी राज्यों में महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रयास कर सकते हैं। अधिकारियों ने राज्यों को सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है, इस बात पर जोर देते हुए कि हालांकि नेटवर्क बाधित हो गया है, खतरा पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है।
क्यों मायने रखता है
कनाडा द्वारा खालिस्तानी नेटवर्कों पर कार्रवाई उसके दृष्टिकोण में एक उल्लेखनीय बदलाव का संकेत देती है, जिससे पंजाब में भारत की सुरक्षा और स्थिरता बढ़ सकती है। दोनों देशों के बीच बढ़ा हुआ सहयोग कनाडाई धरती से संचालित होने वाले भारत विरोधी तत्वों को काफी कमजोर कर सकता है, लेकिन संभावित जवाबी कार्रवाइयों के बारे में चिंताएं भी बढ़ाता है।
मुख्य तथ्य
- •Modi: Recent meeting in New Delhi discussing Khalistan activities.
- •New Anti: Effective July 18 in Canada, targeting hate speech and religious targeting.
- •CSIS Report: Acknowledges Khalistani extremists' role in 1985 Air India Kanishka Flight 182 bombing.
- •ISI Discomfort: Pakistan's ISI is uneasy due to increased India-Canada cooperation against Khalistani groups.
- •Increased Vigilance in Punjab: Indian agencies warn of potential retaliatory attacks by Khalistani elements in Punjab or neighboring states.
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