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भारत की विकास दर के लिए AI सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के रूप में

Briovo· 02 Jul 2026, 09:31 pm IST1
भारत की विकास दर के लिए AI सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के रूप में

विशेषज्ञों ने "रिफॉर्म्स 3.0" का प्रस्ताव रखा है, जिसमें भारत के आर्थिक परिवर्तन को गति देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के रूप में अपनाने की वकालत की गई है। इस रोडमैप का लक्ष्य अगले दशक में 8% से अधिक की "भारत विकास दर" हासिल करना है, जिसमें AI को सुलभ और किफायती बनाया जाएगा। प्रमुख प्रस्तावों में एक राष्ट्रीय AI टोकन नीति, संप्रभु AI अवसंरचना का निर्माण, कंप्यूट हार्डवेयर का विविधीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना शामिल है। यह रणनीति घरेलू AI क्षमताओं को मजबूत करने और नवाचार को तेज करने पर केंद्रित है, जिससे भारत केवल वैश्विक सॉफ्टवेयर का उपभोक्ता होने के बजाय एक आत्मनिर्भर AI पारिस्थितिकी तंत्र बन सके। यह पहल संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग के लोकतंत्रीकरण के लिए "जियो प्रभाव" के साथ समानताएं दर्शाती है।

AI सारांश

3 bullets

राष्ट्रीय AI टोकन नीति और सब्सिडी

भारत 24 महीनों के भीतर एक राष्ट्रीय AI टोकन नीति लागू करने की योजना बना रहा है, जिसमें AWS, Google और Microsoft जैसे हाइपरस्केलर्स के साथ साझेदारी की जाएगी। इसका लक्ष्य AI का लोकतंत्रीकरण करना है, जैसा कि

संप्रभु AI अवसंरचना का निर्माण

विदेशी API पर निर्भरता कम करने के लिए, भारत का लक्ष्य सर्वम जैसे स्वदेशी AI मॉडल के साथ-साथ प्रमुख ओपन-सोर्स AI मॉडल को घरेलू स्तर पर होस्ट करना है। यह AI अवसंरचना को अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रमों के समान एक रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में मानता है, जो सभी शहरों में बहु-क्षेत्रीय अतिरेक और कम-विलंबता पहुंच पर ध्यान केंद्रित करता है। इस रणनीति में विक्रेता लॉक-इन से बचने के लिए कंप्यूट हार्डवेयर का विविधीकरण भी शामिल है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी और 'इंडिक' AI

भारत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से वैश्विक हाइपरस्केलर्स से क्लाउड और कंप्यूट क्षमता प्राप्त करने के लिए अपने बड़े उपयोगकर्ता आधार और बाजार का उपयोग एक बातचीत उपकरण के रूप में करने की योजना बना रहा है। यह शिक्षा और सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए मुफ्त AI पहुंच को क्रॉस-सब्सिडी देगा। इसके अलावा, 'इंडिक' AI का विकास सभी 22 अनुसूचित भाषाओं के लिए अनुकूलित फाइन-ट्यून्ड मूलभूत मॉडल बनाने का लक्ष्य रखता है, जिससे AI के लाभ टियर-2/3 शहरों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचेंगे।

चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

महत्वपूर्ण चुनौतियों में AI डेटा सेंटरों की उच्च बिजली मांगों के कारण कंप्यूट-ऊर्जा-जलवायु त्रिपक्षीय समस्या, सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियाँ और भौतिक सब्सिडी के पुनर्वितरण की राजनीतिक संवेदनशीलता शामिल है।

क्यों मायने रखता है

AI को एक सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के रूप में अपनाना भारत के लिए निरंतर आर्थिक वृद्धि, तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह AI तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को गति देने का वादा करता है।

मुख्य तथ्य

  • Proposed Growth Rate: Over 8% (
  • AI R&D Spending Goal: Shift from USD 49 billion annual physical subsidies towards cognitive capacity
  • Domestic Hardware Matrix: 40% AWS Trainium, 30% Google TPUs, 30% NVIDIA GPUs
  • AI Access Cost: USD 2 billion annually (0.06% of GDP) for top institutions
  • Languages: Optimized across all 22 Scheduled Languages

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