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बिलासपुर HC: संविदा, अतिथि महिला कर्मियों को भी मातृत्व अवकाश का वेतन मिलेगा

Briovo· 24 Jun 2026, 05:31 pm IST
बिलासपुर HC: संविदा, अतिथि महिला कर्मियों को भी मातृत्व अवकाश का वेतन मिलेगा

बिलासपुर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि मातृत्व लाभ महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है, दया नहीं. इसने संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अतिथि महिला कर्मचारियों को भी पूरे मातृत्व अवकाश वेतन का विस्तार किया है. यह महत्वपूर्ण निर्णय अतिथि व्याख्याता शिल्पी शुक्ला के मामले में आया, जिन्हें नियमित कर्तव्यों के बावजूद मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित कर दिया गया था. कोर्ट ने रोजगार की प्रकृति के आधार पर मातृत्व लाभ से इनकार करना अवैध और अमानवीय बताया, और उच्च शिक्षा विभाग को तीन महीने के भीतर शुक्ला को भुगतान करने का निर्देश दिया. यह फैसला हजारों अस्थायी महिला कर्मचारियों को लाभान्वित करेगा.

AI सारांश

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मातृत्व अधिकारों पर ऐतिहासिक फैसला

बिलासपुर हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें यह घोषित किया गया है कि मातृत्व लाभ महिलाओं का एक अंतर्निहित संवैधानिक अधिकार है, न कि केवल एक अनुकंपा भाव. यह फैसला मातृत्व अवकाश और पूर्ण वेतन के दायरे को नियमित सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ संविदात्मक, दैनिक वेतनभोगी और अतिथि महिला श्रमिकों तक बढ़ाता है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि रोजगार की प्रकृति के आधार पर इन लाभों से इनकार करना अवैध और अमानवीय है.

शिल्पी शुक्ला का मामला

यह ऐतिहासिक निर्णय रायपुर के शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ कॉलेज में अतिथि व्याख्याता शिल्पी शुक्ला द्वारा दायर एक याचिका से उपजा है. उन्हें 2025 में लिए गए मातृत्व अवकाश के लिए वेतन से वंचित कर दिया गया था, जिसमें उच्च शिक्षा विभाग ने उनकी संविदात्मक स्थिति का हवाला दिया था. शुक्ला, जिन्होंने एक नियमित व्याख्याता के समान सभी कर्तव्यों का पालन किया था, ने इस इनकार को अदालत में चुनौती दी.

भेदभाव पर कोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि मातृत्व एक प्राकृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है, और केवल रोजगार की प्रकृति के कारण मातृत्व लाभ को रोकना अनुचित है. अदालत ने कहा कि ऐसे कार्य न केवल कानून की भावना के विपरीत हैं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और समानता के अधिकार का भी उल्लंघन करते हैं. इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि मातृत्व अधिकारों के संबंध में विभिन्न श्रेणियों की महिला कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार करना भेदभावपूर्ण है.

भुगतान का आदेश और भविष्य के निहितार्थ

अदालत ने उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि वह शिल्पी शुक्ला को उनके सभी लंबित मातृत्व अवकाश के बकाए का भुगतान तीन महीने के भीतर करे. इस फैसले के दूरगामी परिणाम होने की उम्मीद है, जो सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों में हजारों संविदात्मक, दैनिक वेतनभोगी और अतिथि महिला कर्मचारियों के लिए एक मिसाल कायम करेगा. अब नियोक्ताओं को केवल रोजगार के प्रकार के आधार पर मातृत्व लाभ से इनकार करना मुश्किल होगा.

क्यों मायने रखता है

बिलासपुर हाईकोर्ट का यह फैसला विभिन्न क्षेत्रों में संविदा और अतिथि महिला कर्मचारियों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा, जिससे उन्हें समान मातृत्व लाभ सुनिश्चित होंगे. यह ठेके के आधार पर भेदभावपूर्ण रोजगार प्रथाओं को चुनौती देने वाली एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम करता है, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और महिला कल्याण को बढ़ावा देता है.

मुख्य तथ्य

  • Court Ruling Date: June 24, 2026
  • Petitioner: Shilpi Shukla, Guest Lecturer, Raipur
  • Original Denial Reason: Shilpi Shukla was an 'Atithi Vyakhayata' (Guest Lecturer), not a regular employee.
  • Court Stance on Maternity Benefits: Constitutional, human, and statutory right, not a দয়া (favor).
  • Payment Directive: Higher Education Department to pay within three months.
  • Scope of Beneficiaries: Contractual, daily wage, muster roll, and guest female employees.

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