ओडिशा की कक्षा 8 की किताबों में त्रुटियां: आइज़ैक न्यूटन "महान पायलट", नियामगिरि…
ओडिशा के एससीईआरटी के कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां पाई गई हैं, जिनमें अकेले कक्षा 8 की किताबों में 705 त्रुटियां हैं। इनमें आइज़ैक न्यूटन को "महान पायलट" बताना, नियामगिरि पहाड़ियों को झारखंड में दर्शाना और कर्नाटक विधानसभा को ओडिशा विधानसभा बताना जैसी प्रमुख गलतियां शामिल हैं। अधिकारियों ने इसे छह महीने की संक्षिप्त प्रकाशन अवधि और अपर्याप्त प्रूफरीडिंग को जिम्मेदार ठहराया है। विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, छात्र इस शैक्षणिक वर्ष में इन किताबों का उपयोग करेंगे और कक्षाओं में त्रुटियों को सुधारा जाएगा। एक 3-सदस्यीय समिति मामले की जांच कर रही है, और मुख्यमंत्री मांझी ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
AI सारांश
3 bulletsव्यापक त्रुटियां उजागर
हालिया रिपोर्टों से पता चला है कि ओडिशा के राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा कक्षा 1 से 8 के लिए प्रकाशित 55 नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां हैं। सबसे अधिक त्रुटियां, 705, अकेले कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तकों में पाई गईं, जिससे अभिभावकों, शिक्षाविदों और राजनीतिक विपक्ष में व्यापक आलोचना हुई।
स्पष्ट तथ्यात्मक त्रुटियां
त्रुटियों में सामान्य व्याकरण संबंधी गलतियों से लेकर गंभीर तथ्यात्मक अशुद्धियाँ शामिल हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा 8 की विज्ञान की पुस्तक में सर आइज़ैक न्यूटन को गलत तरीके से 'महान पायलट' बताया गया है, जबकि सामाजिक विज्ञान की पुस्तक ने ओडिशा की नियामगिरि पहाड़ियों को झारखंड में दर्शाया है और कर्नाटक विधानसभा भवन को ओडिशा विधानसभा के रूप में गलत लेबल किया है।
विरोध प्रदर्शन और आधिकारिक प्रतिक्रिया
एनएसयूआई और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर में इन त्रुटियों के लिए जवाबदेही की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। जवाब में, एससीईआरटी निदेशक मधुस्मिता साहू ने कहा कि त्रुटियां पाई गई हैं, लेकिन छात्र मौजूदा किताबों का उपयोग करना जारी रखेंगे, और शिक्षकों को कक्षाओं में गलतियों को इंगित करने और सुधारने का निर्देश दिया गया है। भविष्य के संस्करणों के लिए सुधार अगले शैक्षणिक वर्ष में शामिल किए जाएंगे।
जांच और जवाबदेही
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने नाराजगी व्यक्त की है और मामले की उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दिया है। विकास आयुक्त डीके सिंह की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो पाठ्यपुस्तक तैयारी प्रक्रिया में हुई चूक की जांच करेगी और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है।
जल्दबाजी में उत्पादन पर दोष
अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि त्रुटियों का कारण अत्यधिक संक्षिप्त प्रकाशन समय-सीमा है, जिसमें एससीईआरटी को पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए केवल छह महीने का समय मिला, जबकि एनसीईआरटी की सामान्य प्रक्रिया में तीन साल लगते हैं। उन्होंने अपर्याप्त प्रूफरीडिंग, लापरवाही और डेस्कटॉप प्रकाशन के दौरान एनसीईआरटी सामग्री पर अत्यधिक निर्भरता को भी जिम्मेदार ठहराया।
क्यों मायने रखता है
स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में व्यापक त्रुटियां शिक्षा की गुणवत्ता को कम करती हैं और छात्रों को गलत जानकारी दे सकती हैं। यह घटना पाठ्यपुस्तक विकास और समीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियों को उजागर करती है, जिससे राज्य की शिक्षा प्रणाली के भीतर अकादमिक मानकों और जवाबदेही के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं।
मुख्य तथ्य
- •Total Errors Detected: 1,678 errors across 55 textbooks
- •Class 8 Books Errors: 705 errors in Class 8 textbooks
- •Publishing Timeline: 6 months for SCERT vs. 3 years for NCERT
- •Probe Committee: 3-member committee headed by Development Commissioner DK Singh
- •Implementation: Students to continue with current books; corrections in next academic year's edition
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