कोटा: अटरू खेल मैदान बदहाल, करोड़ों के अनुदान के बावजूद दुर्दशा जारी
कोटा के अटरू में 18 बीघा में बना धोक तलाई खेल मैदान, पिछली कांग्रेस सरकार के तहत 1 करोड़ रुपये के अनुदान के बावजूद, जर्जर स्थिति में है। अतिक्रमण से लंबे संघर्ष के बाद मुक्त कराए गए इस मैदान को फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी और खो-खो जैसी सुविधाओं के साथ विकसित किया गया था, जिसमें शौचालय और स्नानघर भी शामिल थे। हालांकि, उपेक्षा के कारण वॉलीबॉल नेट टूटे हुए हैं, शौचालयों के दरवाजे और फिटिंग गायब हैं, और वॉकिंग ट्रैक क्षतिग्रस्त है। स्थानीय खिलाड़ी और निवासी बिगड़ती परिस्थितियों पर गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं, दैनिक उपयोगकर्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सहायक अभियंता ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
AI सारांश
3 bulletsपुनर्ग्रहण के लिए ऐतिहासिक संघर्ष
अटरू में 18 बीघा में फैले धोक तलाई खेल मैदान को अतिक्रमण के खिलाफ लंबी लड़ाई का सामना करना पड़ा। स्थानीय युवाओं ने जमीन को मुक्त कराने के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष किया, अंततः तत्कालीन मंत्री मदन दिलावर के प्रयासों से इसे राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नाम पंजीकृत किया गया।
महत्वपूर्ण निवेश, बाद में उपेक्षा
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान, मैदान को स्टेडियम के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें चारदीवारी, फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे विभिन्न खेलों के लिए मैदान, और शौचालय, स्नानघर और एक कार्यालय जैसी आवश्यक सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि, रखरखाव की कमी के कारण ये सुविधाएं तब से खराब हो गई हैं।
क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचा और सुरक्षा चिंताएँ
हालिया निरीक्षण में टूटे हुए वॉलीबॉल नेट पाए गए हैं, जिनमें से कुछ बिजली ट्रांसफार्मर के पास लटके हुए हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा है। शौचालयों के दरवाजे, टाइल्स और नल की फिटिंग गायब हैं, जो चोरी और तोड़फोड़ का संकेत है। मैदान के चारों ओर का वॉकिंग ट्रैक भी ढीली बजरी के साथ क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे दैनिक चलने वालों और एथलीटों को असुविधा होती है।
सामुदायिक प्रभाव और स्थानीय आक्रोश
मैदान की जर्जर स्थिति से दर्जनों खिलाड़ी प्रभावित होते हैं जो प्रतिदिन फुटबॉल और क्रिकेट अभ्यास के लिए इसका उपयोग करते हैं, साथ ही कई पुरुष और महिलाएं जो सैर के लिए आते हैं। केंद्रीय रूप से स्थित होने के कारण, मैदान धार्मिक आयोजनों और राजनीतिक रैलियों की भी मेजबानी करता है। स्थानीय खिलाड़ियों, युवाओं और निवासियों ने लगातार उपेक्षा पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और भविष्य के आश्वासन
सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजेंद्र बैरवा ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है और मैदान की स्थिति का आकलन करने पर, पिछले कार्यों की जानकारी एकत्र करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि मैदान को बहाल करने के लिए जालियों की मरम्मत और अन्य आवश्यक सुधार सहित आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
क्यों मायने रखता है
अटरू के धोक तलाई खेल मैदान की उपेक्षा से सैकड़ों दैनिक उपयोगकर्ता प्रभावित होते हैं, जिनमें एथलीट और स्थानीय निवासी शामिल हैं। महत्वपूर्ण निवेश के बावजूद, बिगड़ता बुनियादी ढांचा सुरक्षा खतरों को जन्म देता है और खेल विकास में बाधा डालता है, जो रखरखाव और संसाधन प्रबंधन में एक गंभीर विफलता को उजागर करता है। उचित सुविधाओं की कमी खेलों में भागीदारी को हतोत्साहित करती है और सामुदायिक कल्याण को प्रभावित करती है।
मुख्य तथ्य
- •Location: Dhok Talai, Atru, Kota
- •Area: 18 bigha
- •Initial Grant: ₹1 crore (under previous Congress government)
- •Current Condition: Deteriorating; broken nets, missing fittings, damaged track
- •Responsible Department (current): Public Works Department (PWD)
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