इलाहाबाद HC ने चौथी मैटरनिटी लीव याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। शशि कुमारी ने अपने अनुरोध को अस्वीकार करने वाले आदेश को चुनौती दी थी, उनका तर्क था कि उन्होंने पिछले बच्चों के लिए छुट्टी नहीं ली थी। हालांकि, कोर्ट ने मौजूदा नियमों का हवाला दिया, जिसके तहत आम तौर पर केवल दो जीवित बच्चों तक ही मैटरनिटी लीव मिलती है। राज्य सरकार ने कहा कि वह पहले छुट्टी ले चुकी हैं और मौजूदा नियमों के तहत अपने चौथे बच्चे के लिए इसकी हकदार नहीं थीं। हाई कोर्ट ने मूल फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया।
AI सारांश
3 bulletsचौथी मैटरनिटी लीव की याचिका खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी शशि कुमारी द्वारा अपने चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने संभल के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर के एक पिछले आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी 6 महीने की मैटरनिटी लीव की मांग को खारिज कर दिया गया था। कोर्ट का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लाभ से संबंधित मौजूदा नियमों पर आधारित था।
याचिकाकर्ता का तर्क और राज्य का रुख
शशि कुमारी के वकील ने तर्क दिया कि उन्होंने अपने पहले तीन बच्चों के लिए मैटरनिटी लीव नहीं ली थी, इसलिए उन्हें चौथे बच्चे के लिए इसे दिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारी के इनकार को 'गलत और मनमाना' बताया। इसके विपरीत, राज्य सरकार के वकील ने कहा कि कुमारी पहले मैटरनिटी लीव ले चुकी हैं और नियमों के अनुसार, अपने चौथे बच्चे के लिए इसकी हकदार नहीं थीं।
कोर्ट ने मौजूदा नियमों को बरकरार रखा
जस्टिस चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी और कहा कि अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि मौजूदा मैटरनिटी लीव के नियम आमतौर पर दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारियों को 180 दिनों की छुट्टी प्रदान करते हैं। इसका तात्पर्य है कि मानक छुट्टी आमतौर पर दो या अधिक जीवित बच्चों के बाद लागू नहीं होती है।
मैटरनिटी लीव नियम पुस्तिका
नियमों के अनुसार, महिला सरकारी कर्मचारी 180 दिनों की मैटरनिटी लीव की हकदार होती हैं, आमतौर पर दो जीवित बच्चों तक। इस अवधि के दौरान उन्हें पूरा वेतन मिलता है, और छुट्टी उनके सामान्य अवकाश खाते से नहीं काटी जाती है। गर्भपात/गर्भपात की स्थिति में, बच्चों की संख्या की परवाह किए बिना, 45 दिनों की छुट्टी का भी प्रावधान है। हाल के संशोधनों में सरोगेसी मामलों के लिए भी प्रावधान शामिल हैं।
क्यों मायने रखता है
यह मामला सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव नियमों की व्याख्या और उनके आवेदन पर प्रकाश डालता है, खासकर उन बच्चों की संख्या के संबंध में जिनके लिए ऐसी छुट्टी का लाभ उठाया जा सकता है। यह भविष्य में इसी तरह के अनुरोधों के लिए एक मिसाल कायम करता है।
मुख्य तथ्य
- •Court: Allahabad High Court
- •Petitioner: Shashi Kumari, government employee
- •Plea: Maternity leave for fourth child
- •Ruling: Plea dismissed
- •Reason: Existing rules generally limit maternity leave to two living children
- •Standard Maternity Leave: 180 days (approx. 6 months) for up to two living children
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