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कलबुर्गी: नाबालिग से दुष्कर्म के लिए 20 साल का कठोर कारावास; बाल विवाह के लिए परिजन…

Briovo· 10 Jul 2026, 02:41 pm IST

कलबुर्गी की एक अदालत ने 24 वर्षीय नागप्पा चदबनूर को नाबालिग लड़की से कई बार दुष्कर्म करने के आरोप में 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता के माता-पिता, निंगप्पा बद्दर (46) और निंगम्मा (40), और उसके पति, सिद्दप्पा हरकांतची (25) को भी बाल विवाह में सुविधा देने के लिए एक-एक साल जेल की सजा सुनाई। पीड़िता को मार्च 2024 में बहला-फुसलाकर दुष्कर्म किया गया था, और फिर मई 2024 में जबरन शादी करा दी गई। नागप्पा ने उसे परेशान करना और दुष्कर्म करना जारी रखा, जिसके बाद उसने अपनी आपबीती बताई और पुलिस जांच शुरू हुई। विशेष लोक अभियोजक शांतवीरा बी. थुप्पदा ने सफलतापूर्वक मामले की पैरवी की, जिससे पॉक्सो, बीएनएस और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत दोषसिद्धि सुनिश्चित हुई। अदालत ने पीड़िता के लिए ₹5 लाख मुआवजे का भी आदेश दिया।

AI सारांश

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अदालत ने सुनाई कड़ी सजा

कलबुर्गी की अतिरिक्त जिला एवं सत्र (विशेष पॉक्सो) फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय-1 ने एक कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश एस.एल. चव्हाण ने 24 वर्षीय नागप्पा चदबनूर को एक नाबालिग लड़की के बार-बार बलात्कार के लिए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला कमजोर नाबालिगों की सुरक्षा के लिए अदालत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

माता-पिता और पति को भी मिली सजा

बाल विवाह के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अदालत ने पीड़िता के माता-पिता, निंगप्पा बद्दर और निंगम्मा, और उसके पति, सिद्दप्पा हरकांतची को भी एक-एक साल जेल की सजा सुनाई। उन्हें नाबालिग के विवाह को सुगम बनाने का दोषी पाया गया, जो इस सामाजिक बुराई को बढ़ावा देने के कानूनी परिणामों पर प्रकाश डालता है। उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

भयानक अपराध का विवरण

अभियोजन पक्ष ने खुलासा किया कि नागप्पा चदबनूर ने नाबालिग का पीछा किया और उसे बहला-फुसलाकर मार्च 2024 में उससे दुष्कर्म किया। इसके बावजूद, उसके माता-पिता ने मई 2024 में उसे सिद्दप्पा हरकांतची से शादी करने के लिए मजबूर किया। नागप्पा ने उसे परेशान करना और सितंबर 2024 में फिर से दुष्कर्म करना जारी रखा, उसे एक रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया।

पुलिस जांच और अभियोजन

नागप्पा द्वारा टकराव के प्रयास के दौरान दी गई मौत की धमकियों के बाद पीड़िता द्वारा अपने माता-पिता को अपनी आपबीती बताने से पुलिस जांच शुरू हुई। वाडी के सब-इंस्पेक्टर तिरुमुलेश और चित्तपुर के सर्कल इंस्पेक्टर चंद्रशेखर तिगडी ने सावधानीपूर्वक जांच की और एक आरोप पत्र दायर किया। विशेष लोक अभियोजक शांतवीरा बी. थुप्पदा ने दृढ़ता से मामले की पैरवी की, जिसमें पुख्ता सबूत पेश किए गए।

पीड़िता को मिलेगा मुआवजा

पीड़िता द्वारा सहन किए गए गंभीर आघात को पहचानते हुए, अदालत ने कानूनी सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को ₹5,00,000 का वित्तीय मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया। यह राशि उसके पुनर्वास और ठीक होने में सहायता के लिए एक महीने के भीतर वितरित करने अनिवार्य है, ताकि इस दर्दनाक अनुभव के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम किया जा सके।

क्यों मायने रखता है

यह मामला नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई दोनों के खिलाफ न्यायपालिका के कड़े रुख को उजागर करता है, जिसमें सभी शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया गया है।

मुख्य तथ्य

  • Main Accused Convicted: Nagappa Chadabanura (24)
  • Sentence for Rape: 20 years rigorous imprisonment
  • Convicted for Child Marriage: Victim's parents (Ningappa Badder, Ningamma) and husband (Siddappa Harakanchi)
  • Sentence for Child Marriage: 1 year imprisonment each
  • Compensation Ordered: ₹5,00,000 for the victim
  • Court Presided By: Judge S.L. Chavan

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