राजस्थान में UCC के लिए पैनल बनेगा, लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों के बाद अब राजस्थान भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. राज्य सरकार ने मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने और सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. प्रस्तावित UCC का एक महत्वपूर्ण पहलू लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीकरण होगा. नए कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से संबंधित सभी नागरिकों को समान कानूनों के दायरे में लाना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और बहुविवाह पर संभावित प्रतिबंध लगाना है. सरकार आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पेश करने की योजना बना रही है.
AI सारांश
3 bulletsराजस्थान भी UCC की ओर
उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद, राजस्थान ने भी समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं. इस कदम का लक्ष्य सभी नागरिकों को व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाना है, जो मौजूदा अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों जैसे हिंदू कोड और मुस्लिम पर्सनल लॉ से अलग होगा. राज्य ने नए प्रावधानों के तहत आदिवासी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया है.
लिव-इन का अनिवार्य पंजीकरण
राजस्थान के प्रस्तावित UCC का एक महत्वपूर्ण पहलू लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य करना है. यह नियामक उपाय दर्शाता है कि राज्य के भीतर ऐसे रिश्तों को कानूनी रूप से कैसे मान्यता दी जाएगी और शासित किया जाएगा. इस कदम से लिव-इन व्यवस्थाओं को अधिक स्पष्टता और कानूनीF मान्यता मिलने की उम्मीद है.
विशेषज्ञ समिति का गठन
समान नागरिक संहिता से संबंधित विभिन्न राज्य कानूनों का अध्ययन करने और सिफारिशें प्रदान करने के लिए एक छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं और इसमें पूर्व आईएएस शत्रुघ्न सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हैं. उनका जनादेश अध्ययन में तेजी लाना और अपनी सिफारिशें तुरंत प्रस्तुत करना है.
लैंगिक समानता पर जोर
UCC का उद्देश्य संपत्ति विरासत, विवाह और तलाक जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को समान अधिकार देकर लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है. कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और विवाह व तलाक के अनिवार्य पंजीकरण को सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल हो सकते हैं. यह पहल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सभी नागरिकों के लिए समान व्यवहार सुनिश्चित करने का प्रयास करती है.
संसदीय कार्रवाई की योजना
राजस्थान सरकार आगामी विधानसभा सत्र में UCC के लिए एक विधेयक पेश करने का इरादा रखती है, जिसमें इस साल इसे कानून बनाने के प्रयास किए जाएंगे. यह विधायी दबाव राज्य भर में व्यक्तिगत कानूनों को सुव्यवस्थित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह कदम अन्य भारतीय राज्यों में इसी तरह की विधायी कार्रवाइयों का अनुसरण करता है, जो UCC कार्यान्वयन की दिशा में एक व्यापक प्रवृत्ति का संकेत देता है.
क्यों मायने रखता है
राजस्थान में यूसीसी के लागू होने से सभी समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं, जिससे विवाह, तलाक और विरासत सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं पर असर पड़ेगा. लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीकरण एक उल्लेखनीय बदलाव है.
मुख्य तथ्य
- •Committee Head: Former SC Justice Ranjana Prakash Desai
- •Committee Members: Six members including ex-IAS, HC Additional Advocate General
- •Key Provision: Mandatory registration for live-in relationships
- •Targeted Implementation: Law to be brought in this year's assembly session
- •Affected Areas: Marriage, divorce, inheritance, adoption, maintenance
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…