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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में कचरा फैलाने पर लगाई फटकार, विदेशों में भारतीयों की…

Briovo· 31 Jul 2026, 11:49 pm IST
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में कचरा फैलाने पर लगाई फटकार, विदेशों में भारतीयों की…

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में कचरा फैलाने की बढ़ती समस्या पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा कि जो नागरिक विदेशों में साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं, वे भारत में अक्सर नागरिक नियमों की अनदेखी करते हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के पास कचरे के कारण पैदा होने वाले गंभीर स्वास्थ्य और स्वच्छता जोखिमों पर प्रकाश डाला। जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे ने नागरिक अधिकारियों द्वारा सख्त प्रवर्तन और अधिक सार्वजनिक जिम्मेदारी का आग्रह किया, यह सवाल करते हुए कि क्या यह व्यवहार "स्वतंत्रता और लोकतंत्र की कीमत" था। कोर्ट ने स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के प्रति नागरिकों के मौलिक कर्तव्य पर जोर दिया और सार्वजनिक स्थानों को कचरा स्थल बनने से रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया।

AI सारांश

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कोर्ट ने कूड़ेदान की आदतों की आलोचना की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई में बड़े पैमाने पर कूड़ा फैलाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने एक चिंताजनक विरोधाभास देखा जहाँ भारतीय नागरिक विदेशों में साफ-सफाई के मानकों का लगन से पालन करते हैं, लेकिन अक्सर अपने ही देश में उनकी उपेक्षा करते हैं, यह सवाल करते हुए कि क्या यह 'स्वतंत्रता और लोकतंत्र की कीमत' थी।

कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के पास प्रदूषण

कोर्ट की यह टिप्पणी मुंबई के कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के पास रहने वाले निवासियों द्वारा प्रदूषण, दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और स्वास्थ्य जोखिमों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आई। पूर्वी उपनगरों में स्थित यह क्षेत्र अपर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं से काफी प्रभावित है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है।

सख्त प्रवर्तन और जिम्मेदारी के लिए आह्वान

जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) से नियमों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने नागरिक अधिकारियों से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में 'निर्दयी' होने का आह्वान किया और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए नागरिकों के मौलिक कर्तव्य पर जोर दिया। कोर्ट ने समुद्र तटों पर प्लास्टिक कचरे के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला, शहर की नागरिक भावना पर सवाल उठाया।

नागरिक निकाय द्वारा अपशिष्ट का कुप्रबंधन

कोर्ट ने नगरपालिका के ट्रकों द्वारा कचरे के कुप्रबंधन पर भी चिंता जताई, विशेष रूप से राजाबाई टॉवर और हाईकोर्ट भवन जैसे विरासत स्थलों के पास। इसने टिप्पणी की कि ऐसे दृश्य पर्यटकों को हतोत्साहित करते हैं और शहर की छवि खराब करते हैं। पीठ ने नागरिक निकाय को एक सप्ताह के भीतर इस मामले पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

नागरिक और नागरिक कर्तव्य

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मुंबई की कचरा और प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने में नागरिक और नगरपालिका प्रणाली दोनों की साझा जिम्मेदारी है। इसने एमसीजीएम के नारे 'स्वच्छ मुंबई, सुंदर मुंबई, आपली मुंबई, सुंदर मुंबई' का हवाला दिया, यह सुझाव देते हुए कि इसके इरादे सार्वजनिक निष्क्रियता और नागरिक मशीनरी की कमियों दोनों से सामूहिक रूप से विफल हो रहे हैं। एक स्वच्छ और स्वस्थ शहर प्राप्त करने के लिए प्रभावी उपाय महत्वपूर्ण हैं।

क्यों मायने रखता है

बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां मुंबई में बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक जिम्मेदारी की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं, जो सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी सौंदर्यशास्त्र को प्रभावित करती हैं।

मुख्य तथ्य

  • Court Observation: Citizens litter in India but maintain cleanliness abroad.
  • Judges: Justices G.S. Kulkarni and Aarti Sathe.
  • Location of Petitions: Kanjurmarg dumping ground, Mumbai.
  • Civic Body Referenced: Municipal Corporation of Greater Mumbai (MCGM).
  • Court Directive: Civic officials to be 'ruthless' in taking action within a week.

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