Briovo

Article

Bombay High CourtWomen's RightsPersonal LibertyArticle 21

बॉम्बे HC: बालिग महिला को घर लौटने पर मजबूर नहीं कर सकता राज्य

Briovo· 07 Jul 2026, 06:29 pm IST
बॉम्बे HC: बालिग महिला को घर लौटने पर मजबूर नहीं कर सकता राज्य

बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक बालिग महिला यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि वह कहाँ रहती है, किससे शादी करती है, और आगे की पढ़ाई करती है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि न तो राज्य और न ही उसके माता-पिता उसे उसकी इच्छा के खिलाफ घर लौटने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह फैसला एक 21 वर्षीय महिला से जुड़े मामले में आया, जिसने अपने बड़े चचेरे भाई से शादी के दबाव के कारण अपना हैदराबाद स्थित घर छोड़ दिया था। वह अब मुंबई में स्वतंत्र रूप से काम कर रही है और रह रही है। कोर्ट ने जोर दिया कि ये व्यक्तिगत विकल्प भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित हैं, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।

AI सारांश

3 bullets

बालिग महिला की स्वायत्तता बरकरार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक बालिग महिला को यह तय करने की पूरी स्वतंत्रता है कि वह कहाँ रहती है, किससे शादी करती है और क्या वह आगे की पढ़ाई करती है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि न तो राज्य और न ही उसके अधिकारी उसे उसकी इच्छा के खिलाफ माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद के महत्व को रेखांकित करता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह फैसला एक 21 वर्षीय महिला से जुड़े मामले से उपजा है, जिसने स्वेच्छा से अपना हैदराबाद स्थित घर छोड़ दिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई के माध्यम से दायर उसकी याचिका में खुलासा हुआ कि उसका परिवार उस पर अपने से लगभग 10 साल बड़े चचेरे भाई से शादी करने का दबाव बना रहा था। उसने अपने परिवार को रूढ़िवादी और कट्टरपंथी बताया, जो उसे भावनात्मक उत्पीड़न का शिकार बनाता था और उसकी शिक्षा व करियर के अवसरों को बाधित करता था।

अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षण

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र गुघे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे फैसले व्यक्तिगत होते हैं और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित हैं। यह अनुच्छेद जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तियों को राज्य या दूसरों के अनुचित हस्तक्षेप के बिना अपने जीवन से संबंधित निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो। अदालत ने जोर देकर कहा कि पुलिस उसे लापता व्यक्ति नहीं मान सकती और न ही उसे जबरन वापस भेज सकती है।

पुलिस को गुमशुदगी रिपोर्ट बंद करने का निर्देश

हाई कोर्ट ने तेलंगाना पुलिस को महिला के माता-पिता द्वारा दर्ज कराई गई गुमशुदगी रिपोर्ट को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, अदालत ने पुलिस को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ उसके माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर न किया जाए। यह आदेश महिला की स्वायत्तता और विकल्पों के लिए सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण परत प्रदान करता है।

महिला की वर्तमान स्थिति और घर लौटने से इनकार

सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने महिला से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, जिसने खुलासा किया कि वह वर्तमान में मुंबई में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के साथ काम कर रही है और पेइंग गेस्ट के रूप में रह रही है। उसकी माँ द्वारा यह आश्वासन देने वाला हलफनामा प्रस्तुत करने के बावजूद कि कोई जबरन शादी नहीं होगी और उसकी शिक्षा में बाधा नहीं आएगी, महिला ने स्पष्ट रूप से घर लौटने की अपनी अनिच्छा व्यक्त की। अदालत ने उसके फैसले का सम्मान किया।

क्यों मायने रखता है

यह फैसला भारत में बालिग महिलाओं के लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्वायत्तता को मजबूत करता है, विशेष रूप से निवास, विवाह और शिक्षा जैसे व्यक्तिगत जीवन विकल्पों के संबंध में, जिससे एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम होती है।

मुख्य तथ्य

  • Court: Bombay High Court
  • Ruling Date: July 2, 2026 (order copy available on Tuesday)
  • Woman's Age: 21 years
  • Reason for leaving home: Pressure to marry older cousin
  • Current Residence: Mumbai

क्या यह मददगार था?

Reader pulse

0 votes
Test yourself

Generate a 5-question quiz from this article.

चर्चा

Discussion (0)

Loading…