पूर्व मसूदा विधायक ब्रह्मदेव कुमावत का निधन
मसूदा के पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ब्रह्मदेव कुमावत का 27 जुलाई को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बांदनवाड़ा से नसीराबाद उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया था, जहाँ से उन्हें अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। कुमावत, जिनका जन्म 30 नवंबर 1959 को अजमेर के भिनाय के बांदनवाड़ा में हुआ था, एक व्यवसायी थे और कुमावत समाज के एक प्रभावशाली नेता थे। उन्होंने 2008 में कांग्रेस का टिकट न मिलने पर मसूदा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था और अशोक गहलोत सरकार में संसदीय सचिव के रूप में कार्य किया। उनके निधन से मसूदा क्षेत्र और अजमेर जिले में शोक की लहर दौड़ गई है, वे अपने पीछे चार बेटों को छोड़ गए हैं।
AI सारांश
3 bulletsहृदय गति रुकने से पूर्व विधायक का निधन
मसूदा के पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ब्रह्मदेव कुमावत का 27 जुलाई को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बांदनवाड़ा से नसीराबाद उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
सार्वजनिक सेवा का जीवन
30 नवंबर 1959 को अजमेर के भिनाय के बांदनवाड़ा में जन्मे ब्रह्मदेव कुमावत पेशे से एक व्यवसायी थे। उन्हें अजमेर संभाग में, खासकर कुमावत समाज के बीच, एक अत्यंत प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता माना जाता था। मसूदा और उसके लोगों के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें अपार सम्मान और एक स्थायी विरासत दिलाई।
ऐतिहासिक निर्दलीय जीत
कुमावत ने 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में राजनीतिक इतिहास रचा। कांग्रेस पार्टी द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद, उन्होंने मसूदा निर्वाचन क्षेत्र से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा, और 42,170 वोट हासिल किए। इस जीत ने उन्हें पहली बार विधानसभा में प्रवेश करने का मौका दिया, जिससे उनके मजबूत स्थानीय समर्थन का प्रदर्शन हुआ।
संसदीय सचिव के रूप में भूमिका
अपनी निर्दलीय जीत के बाद, ब्रह्मदेव कुमावत ने तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार को अपना समर्थन दिया। उनके प्रभाव और चुनावी सफलता को पहचानते हुए, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें संसदीय सचिव नियुक्त किया। यह पद राज्य मंत्री के समकक्ष था, जो सरकार के भीतर उनकी महत्वपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।
बाद के चुनावी जुड़ाव
2013 के चुनावों में, कुमावत ने मसूदा से आधिकारिक कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा की मजबूत लहर के कारण हार गए। 2018 में टिकट के लिए दावेदारी करने के बावजूद, उन्होंने पार्टी आलाकमान के अनुरोध पर अपना नामांकन वापस ले लिया, पार्टी एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए संगठन के भीतर काम करना जारी रखा।
क्यों मायने रखता है
ब्रह्मदेव कुमावत का निधन मसूदा की राजनीति के एक युग का अंत है, क्योंकि वह एक प्रमुख निर्दलीय व्यक्ति थे जिन्होंने बाद में कांग्रेस में शामिल होकर क्षेत्रीय गतिशीलता को प्रभावित किया।
मुख्य तथ्य
- •Date of Demise: July 27
- •Cause of Demise: Heart Attack
- •Political Career Highlight: Won Masuda seat as independent in 2008
- •Post Held: Parliamentary Secretary in Ashok Gehlot government
- •Birth Date: November 30, 1959
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