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महाराष्ट्र में खेती और संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं को मिला किसान का दर्जा

Briovo· 03 Jul 2026, 04:20 am IST1
महाराष्ट्र में खेती और संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं को मिला किसान का दर्जा

महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत कृषि, डेयरी और पशुपालन से जुड़ी महिलाओं को औपचारिक रूप से किसान का दर्जा मिलेगा। यह भारत में अपनी तरह का पहला कानून है, जो उन महिलाओं को सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण, फसल बीमा और सब्सिडी का सीधा लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा, जिन्हें पहले पुरुषों के नाम जमीन होने के कारण अनदेखा किया जाता था। इस विधेयक में मुर्गी पालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं को भी शामिल किया गया है, और उन्हें "महिला किसान पहचान पत्र" प्रदान किए जाएंगे ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी मजबूत हो सके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। एक राज्य-स्तरीय समिति कार्यान्वयन की देखरेख करेगी।

AI सारांश

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ऐतिहासिक विधेयक सर्वसम्मति से पारित

महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक अग्रणी 'महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक' पारित किया है। यह ऐतिहासिक कानून भारत में अपनी तरह का पहला है, जिसका उद्देश्य विभिन्न कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देना है। यह विधेयक राज्य में महिला किसानों द्वारा सामना की जाने वाली ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने का प्रयास करता है।

किसान' की व्यापक परिभाषा

नए कानून के तहत, 'महिला किसान' की परिभाषा का काफी विस्तार किया गया है। इसमें अब केवल फसल उगाने वाली महिलाएं ही नहीं, बल्कि पशुपालन, डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाएं भी शामिल हैं। यह समावेशी दृष्टिकोण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान करने वाली महिलाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करना चाहता है।

सरकारी योजनाओं और लाभों तक पहुंच

यह कानून इन महिलाओं को एक आधिकारिक 'किसान का दर्जा' प्रदान करेगा, जिससे वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकेंगी। उन्हें 'महिला किसान पहचान पत्र' भी मिलेगा, जिससे बैंक ऋण, फसल बीमा, सरकारी सब्सिडी, बीज, उर्वरक और मंडियों में सीधी बिक्री तक आसान पहुंच मिलेगी, जो पहले भूमि स्वामित्व की कमी के कारण मुश्किल था।

ऐतिहासिक विसंगतियों का समाधान

ऐतिहासिक रूप से, खेतों में महिलाओं की कड़ी मेहनत, बुवाई से लेकर कटाई तक, अक्सर आधिकारिक रिकॉर्ड में unrecognized रह जाती थी क्योंकि जमीन आमतौर पर पुरुषों के नाम पर दर्ज होती थी। इसने उन्हें महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता और सरकारी समर्थन से बाहर रखा। नया कानून इस अंतर को पाटने, उनके श्रम को वास्तविक पहचान प्रदान करने और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।

कार्यान्वयन और अतिरिक्त सहायता

प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, सरकार एक समर्पित ढांचा स्थापित कर रही है, जिसमें प्रगति की निगरानी के लिए एक राज्य-स्तरीय समिति शामिल है। विधेयक पारित होने के दौरान हुई चर्चाओं में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें पारिवारिक कृषि भूमि में सह-स्वामित्व के सुझाव भी शामिल थे।

क्यों मायने रखता है

यह विधेयक एक लंबे समय से चली आ रही असमानता को दूर करता है जहां कृषि में महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद महिलाओं को किसान का दर्जा और संबंधित लाभ नहीं मिल पाते थे। यह मान्यता लाखों ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय संसाधनों और सरकारी सहायता तक पहुंच प्रदान करके सशक्त करेगी, उनकी स्वतंत्रता को बढ़ावा देगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।

मुख्य तथ्य

  • State: Maharashtra
  • Date of Passage: July 3, 2026
  • Beneficiaries: Women in agriculture, dairy, animal husbandry, poultry, fisheries, beekeeping
  • Key Provision: Official 'farmer status' and 'Woman Farmer Identity Card'
  • Impact: Direct access to government schemes, loans, insurance, subsidies

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