तमिलनाडु विधानसभा ने सरकारी कार्यक्रमों में तमिल थाई वाज़्थु अनिवार्य किया
तमिलनाडु विधानसभा ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा प्रस्तावित एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है, जिसमें सभी सरकारी कार्यक्रमों, संस्थानों, शैक्षणिक निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की शुरुआत में 'तमिल थाई वाज़्थु' (मातृ तमिल की स्तुति) का गायन अनिवार्य किया गया है। डीएमके, एआईएडीएमके और कांग्रेस के समर्थन से उठाया गया यह कदम राज्य गीत के गौरव और सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। विजय ने तमिल की प्राचीन शास्त्रीय भाषा स्थिति और एकता को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को राज्य का अधिकार बताया। यह प्रस्ताव 2021 के मौजूदा सरकारी आदेश को मजबूत करता है और राज्य गीत के संबंध में हालिया गृह मंत्रालय की सलाह पर भी ध्यान देता है।
AI सारांश
3 bulletsअनिवार्य राज्य गीत को अपनाया गया
तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सभी राज्य सरकारी कार्यक्रमों और संस्थानों की शुरुआत में 'तमिल थाई वाज़्थु' का गायन अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस प्रस्ताव को पेश किया, जिसमें तमिल गौरव और पहचान के लिए गीत के महत्व पर जोर दिया गया। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य गीत सार्वजनिक सभाओं में प्रमुख स्थान प्राप्त करे।
व्यापक राजनीतिक सहमति
इस प्रस्ताव को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के साथ-साथ कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों से दुर्लभ सर्वसम्मत समर्थन मिला। मुख्यमंत्री विजय ने सदस्यों से 'तमिल थाई वाज़्थु' के गौरव को बनाए रखने के लिए पार्टी के मतभेदों को एक तरफ रखने का आग्रह किया, यह दावा करते हुए कि इसका अनिवार्य गायन एक राजनीतिक बहस नहीं होनी चाहिए।
कार्यान्वयन का दायरा
नए अनुमोदित प्रस्ताव के तहत, तमिलनाडु में विभिन्न संस्थाओं में कार्यक्रमों के शुरू होने से पहले 'तमिल थाई वाज़्थु' का गायन किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम शामिल हैं। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों में सांस्कृतिक विरासत और राज्य पहचान की भावना पैदा करना है।
ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
प्रस्ताव में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि तमिल विश्व की सबसे पुरानी शास्त्रीय भाषाओं में से एक है और यह एक प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। मनोमनियम सुंदरनार के 1891 के नाटक से ली गई स्तुति 'तमिल थाई वाज़्थु' को 1970 में आधिकारिक रूप से अनिवार्य किया गया था और दिसंबर 2021 में इसे राज्य गीत का दर्जा दिया गया था। यह विधायी कार्रवाई इसकी मौजूदा पहचान और सांस्कृतिक महत्व को मजबूत करती है।
बाहरी निर्देशों के प्रति प्रतिक्रिया
यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा राज्य गीतों के गायन के संबंध में हाल की टिप्पणियों के संदर्भ में भी आया है। गृह मंत्रालय ने पहले जुलाई में आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले 'वंदे मातरम' बजाने के संबंध में एक सलाह जारी की थी, जो राज्य और राष्ट्रगान के आसपास एक व्यापक बातचीत का संकेत देती है।
क्यों मायने रखता है
'तमिल थाई वाज़्थु' का अनिवार्य गायन तमिल सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है और राज्य के अधिकारों पर जोर देता है, जिससे राष्ट्रीय निर्देशों के बीच अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम हो सकती है। यह एक सांस्कृतिक मुद्दे पर मजबूत क्षेत्रीय भावना और राजनीतिक एकता को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- •Approval Date: Monday (Date not specified in article)
- •Mandatory For: Government functions, institutions, educational institutions, universities, public sector undertakings
- •Political Support: DMK, AIADMK, Congress (unanimous approval)
- •Origin of Song: From Manonmaniam Sundaranar's 1891 play 'Manonmaniam'
- •Official Status: State Song since December 21, 2021
- •CM's Party: Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK)
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