कर्नाटक भाजपा ने KPSC पशु चिकित्सा भर्ती घोटाले में CBI जांच की मांग की
कर्नाटक भाजपा नेता आर अशोक ने KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की CBI या न्यायिक जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि KPSC की आंतरिक जांच में विश्वसनीयता की कमी है, जिसमें उम्मीदवारों द्वारा पदों के लिए ₹80 लाख तक के भुगतान का आरोप है। यह घोटाला, संभावित रूप से ₹800 करोड़ का है, जिसमें 400 रिक्तियां शामिल हैं, और अशोक ने प्रश्न पत्र लीक, बेंगलुरु के बाहर कोचिंग और अधिकारियों व बिचौलियों की संलिप्तता का आरोप लगाया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के बाद इन आरोपों के सामने आने पर KPSC ने अंतिम चयन सूची रोक दी है। अशोक ने चेतावनी दी है कि यदि स्वतंत्र जांच का आदेश नहीं दिया गया तो राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
AI सारांश
3 bulletsस्वतंत्र जाँच की मांग
कर्नाटक के विपक्ष के नेता आर अशोक ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित ₹80 लाख के रिश्वत घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने इस मांग को KPSC अध्यक्ष को औपचारिक रूप से संप्रेषित किया और अन्य भाजपा नेताओं और उम्मीदवार प्रतिनिधियों के साथ उनसे मुलाकात की। अशोक ने जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता और जनता के विश्वास को सुनिश्चित करने के लिए एक बाहरीR एजेंसी की आवश्यकता पर बल दिया।
KPSC की आंतरिक जांच पर सवाल
अशोक ने आरोपों की KPSC की आंतरिक जांच कराने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें विश्वसनीयता की कमी है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि अपने ही अधिकारियों द्वारा की गई जांच से जनता या नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों में विश्वास पैदा नहीं होगा। KPSC ने 24 जुलाई को इंडिया टुडे की रिपोर्ट के बाद सामने आए आरोपों और आंतरिक जांच के कारण पहले ही अंतिम चयन सूची रोक दी है।
व्यापक कदाचार के आरोप
यह विवाद 342 नियमित और 58 बैकलॉग पशु चिकित्सा अधिकारी रिक्तियों की भर्ती के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें उम्मीदवारों ने बिचौलियों के माध्यम से व्यवस्थित हेरफेर का आरोप लगाया है। अशोक ने उन दावों पर प्रकाश डाला कि उम्मीदवारों से प्रति पद ₹80 लाख तक की मांग की गई थी, जिससे सभी 400 पदों पर ₹800 करोड़ का संभावित घोटाला हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन उम्मीदवारों ने पैसे दिए थे, उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र लीक और कोचिंग के लिए बेंगलुरु से बाहर ले जाया गया, जिसके परिणामस्वरूप अयोग्य उम्मीदवारों ने उच्च अंक प्राप्त किए।
निहितार्थ और राजनीतिक रुख
अशोक ने चेतावनी दी कि योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर भर्ती से कर्नाटक की लोक सेवा प्रणाली की अखंडता को गंभीर नुकसान होगा और लाखों युवा उम्मीदवारों को हतोत्साहित करेगा। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया, केंद्रीय स्तर पर पेपर लीक के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि कर्नाटक में इसी तरह के मुद्दों को केवल अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। भाजपा ने धमकी दी है कि यदि सरकार स्वतंत्र जांच का आदेश नहीं देती है तो राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी।
क्यों मायने रखता है
एक लोक सेवा आयोग में बड़े भर्ती घोटाले के आरोप सरकारी संस्थानों में विश्वास को कम करते हैं और हजारों उम्मीदवारों के करियर को प्रभावित करते हैं।
मुख्य तथ्य
- •Demanded probe agency: CBI or Judicial Inquiry (sitting HC judge)
- •Alleged scam value: ₹800 crore
- •Cost per post alleged: Up to ₹80 lakh
- •Total vacancies affected: 400 (342 regular, 58 backlog)
- •Recruitment body: Karnataka Public Service Commission (KPSC)
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