पश्चिम बंगाल में डिजिटल जनगणना शुरू, CM ने भरा पहला फॉर्म
पश्चिम बंगाल में 16वीं जनगणना का पहला चरण, डिजिटल स्व-गणना प्रक्रिया, शुरू हो गया है और 15 अगस्त तक चलेगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपना फॉर्म भरकर प्रक्रिया की शुरुआत की और जनता को आश्वासन दिया कि व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने डेटा की गोपनीयता और सांख्यिकीय विश्लेषण व योजना निर्माण के लिए इसके उपयोग पर जोर दिया। यह भारत की पहली "100% डिजिटल" जनगणना है। स्व-गणना के बाद, 16 अगस्त से 14 सितंबर तक मकानों की सूची बनाने का कार्य शुरू होगा। नागरिकों को इसमें भाग लेने और गणनाकर्मियों के साथ सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
AI सारांश
3 bulletsपश्चिम बंगाल में डिजिटल जनगणना शुरू
पश्चिम बंगाल में 16वीं जनगणना का पहला चरण, डिजिटल स्व-गणना, आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। यह अभिनव दृष्टिकोण नागरिकों को 1 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की अनुमति देता है, जो भारत में पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
CM ने उदाहरण पेश किया, डेटा सुरक्षा का आश्वासन
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वयं अपना जनगणना फॉर्म भरकर प्रक्रिया का उद्घाटन किया और सभी नागरिकों से सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए आश्वासन दिया कि एकत्रित की गई सभी जानकारी गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और विकासात्मक योजना के लिए किया जाएगा, जिसमें दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं होगी।
स्व-गणना और मकान सूचीकरण का कार्यक्रम
स्व-गणना चरण 15 अगस्त को समाप्त होगा, जिसके बाद मकान सूचीकरण का कार्य शुरू होगा। 16 अगस्त से 14 सितंबर, 2026 तक, गणनाकर्मी घरों की व्यापक सूची तैयार करने के लिए भौतिक सर्वेक्षण करेंगे। स्व-गणना करने वाले नागरिकों को सत्यापन के दौरान गणनाकर्मियों को प्रस्तुत करने के लिए 11 अंकों की आईडी मिलेगी।
किसी दस्तावेज को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं
इस डिजिटल जनगणना की एक प्रमुख विशेषता प्रक्रिया का सरलीकरण है; नागरिकों को स्व-गणना के दौरान कोई भी दस्तावेज अपलोड या जमा करने की आवश्यकता नहीं है। इसकी पुष्टि कोलकाता नगर निगम आयुक्त और नगर निगम क्षेत्र की मुख्य जनगणना अधिकारी स्मिता पांडे ने की, जिन्होंने यह भी बताया कि गणनाकर्मियों के घर आने पर भी दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होगी।
पिछली सरकार पर देरी का आरोप
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली ममता बनर्जी सरकार की आलोचना करते हुए जनगणना प्रक्रिया में देरी के लिए उनकी निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले साल फरवरी में संपर्क किया था, लेकिन पूर्ववर्ती राज्य प्रशासन जवाब देने में विफल रहा, जिससे पश्चिम बंगाल 'संकीर्ण राजनीतिक कारणों' से जनगणना की तैयारियों में अन्य राज्यों से पीछे रह गया।
क्यों मायने रखता है
यह डिजिटल जनगणना सटीक डेटा संग्रह के लिए महत्वपूर्ण है, जो पश्चिम बंगाल में नीति-निर्माण और विकास पहलों को सूचित करेगा। यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना भी है, जो भविष्य के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के लिए एक मिसाल कायम कर रही है।
मुख्य तथ्य
- •Self-enumeration Period: August 1 to August 15, 2026
- •House Listing Period: August 16 to September 14, 2026
- •Census Type: 16th Indian Census, first 100% digital
- •Chief Minister: Suvendu Adhikari
- •Portal for Self-enumeration: se.census.gov.in
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…