गुलाब कोठारी: अखबार अगले 50 साल तक विश्वसनीय
पत्रिक समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि अखबार अपनी विश्वसनीयता, ज्ञान और सांस्कृतिक संबंध के कारण अगले 50 वर्षों तक प्रासंगिक रहेंगे। जयपुर में आयोजित आईपीपीटीए सेमिनार में कोठारी ने जोर दिया कि डिजिटल युग के बावजूद अखबार सबसे विश्वसनीय माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि अखबारों का समाज से संबंध केवल तकनीक से नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति से जुड़ा है। "पॉलिसी, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी कन्वर्जेंस" विषय पर आधारित सेमिनार में कागज उद्योग के भविष्य, नई तकनीकों और नीतिगत चुनौतियों पर भी चर्चा हुई, जहाँ विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
AI सारांश
3 bulletsअखबार: विश्वसनीयता और भविष्य की प्रासंगिकता
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि अखबार अपनी अंतर्निहित विश्वसनीयता के कारण अपनी प्रमुखता बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि यह विश्वसनीयता, ज्ञान और संस्कृति से उनके जुड़ाव के साथ, डिजिटल परिवर्तन से अप्रभावित, अगले पांच दशकों तक उनके अस्तित्व को बनाए रखेगी।
आईपीपीटीए सेमिनार: उद्योग के भविष्य पर चर्चा
कोठारी ने ये बात जयपुर में आयोजित इंडियन पल्प एंड पेपर टेक्निकल एसोसिएशन (आईपीपीटीए) के जोनल सेमिनार में कही। 'पॉलिसी, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी कन्वर्जेंस' विषय पर आधारित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कागज उद्योग के भविष्य, उभरती प्रौद्योगिकियों और नीति संबंधी बाधाओं पर विचार-विमर्श करने के लिए विशेषज्ञ एकत्र हुए।
तकनीक से परे: शिक्षा और मानव पूंजी
कोठारी ने इस बात पर जोर दिया कि समाचार पत्रों का सार सिर्फ तकनीक से परे है, जो ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा, रोजगार के अवसर पैदा करने के बावजूद, व्यक्तियों को केवल 'मानव संसाधन' तक सीमित कर दिया है, जिससे AI के युग में मानवता की अनुकूलनशीलता पर सवाल उठता है।
कागज उद्योग: निरंतरता और नवाचार
आईपीपीटीए के अध्यक्ष एसवीआर कृष्णन ने कागज उद्योग की चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों, कार्बन उत्सर्जन में कमी और कुशल संसाधन उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत की वार्षिक कागज उत्पादन क्षमता लगभग 30 मिलियन टन बताई, जिसमें कृषि अपशिष्ट, लकड़ी और पुनर्चक्रित रेशों का महत्वपूर्ण उपयोग होता है।
भविष्योन्मुखी उद्योग समायोजन
सेमिनार में एआई, मशीन लर्निंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता जैसे विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। इन विचार-विमर्शों का उद्देश्य कागज उद्योग को उत्पादन प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रदूषण प्रबंधन में भविष्य के परिवर्तनों के लिए तैयार करना है, जिससे इसकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित हो सके।
क्यों मायने रखता है
गुलाब कोठारी की अंतर्दृष्टि तेजी से डिजिटलीकरण हो रही दुनिया में पारंपरिक मीडिया के भविष्य पर एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करती है, जिससे समाचार पत्र उद्योग को आश्वासन मिलता है।
मुख्य तथ्य
- •Speaker: Gulab Kothari, Editor-in-Chief, Patrika Group
- •Event: IPPTA Zonal Seminar
- •Location: Hotel Marriott, Jawahar Circle, Jaipur
- •Theme: Policy, Sustainability & Technology Convergence
- •Paper Industry Annual Capacity: 30 million tons in India
- •Materials Used in Paper Industry: Agricultural waste, wood, recycled fiber
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