यमुना-रामजल के बाद राजस्थान की माही जल संधि पर पुनर्विचार की आस
यमुना जल विवाद और रामजल सेतु लिंक परियोजना में प्रगति के बाद, राजस्थान अब 60 साल पुराने माही जल-साझाकरण समझौते की समीक्षा की उम्मीद कर रहा है। केंद्र और दोनों राज्यों में एक ही पार्टी के शासन के साथ, आशा है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति राजस्थान के लिए माही नदी के पानी का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित कर सकती है। वर्तमान में, राजस्थान को माही बांध से 25-37 टीएमसी पानी मिलता है, जबकि गुजरात को 77 टीएमसी क्षमता से 40 टीएमसी आवंटित किया गया है। यह समीक्षा पश्चिमी राजस्थान को काफी लाभ पहुंचा सकती है, जिससे उसकी लंबे समय से चली आ रही पानी की कमी की समस्याओं का समाधान हो सकता है।
AI सारांश
3 bulletsराजस्थान के लिए उम्मीद की नई किरण
यमुना जल विवाद और रामजल सेतु लिंक परियोजना में हालिया सफलताओं ने राजस्थान में नई उम्मीद जगाई है। राज्य अब छह दशक पुराने माही जल-साझाकरण संधि के संभावित पुनर्मूल्यांकन पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है। केंद्र, राजस्थान और गुजरात में एक ही राजनीतिक दल के शासन से अनुकूल परिणाम की उम्मीद जगी है, बशर्ते पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति हो।
माही समझौते की पृष्ठभूमि
माही जल-साझाकरण समझौता शुरू में 10 जनवरी, 1966 को राजस्थान और गुजरात के बीच हस्ताक्षरित किया गया था। इस लंबे समय से चले आ रहे समझौते के तहत, गुजरात को 55% हिस्सा आवंटित किया गया था, जबकि राजस्थान को माही नदी के पानी का 45% मिला था। माही बांध की कुल भंडारण क्षमता 77 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) है, जिसमें वर्तमान में गुजरात के लिए 40 टीएमसी आरक्षित है, जिससे राजस्थान को अपने उपयोग के लिए 25 से 37 टीएमसी का आवंटन मिलता है।
समीक्षा की वकालत
राजस्थान किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष बद्रीदान नरपुरा ने मूल समझौते के एक महत्वपूर्ण खंड पर प्रकाश डाला। इसमें यह शर्त थी कि गुजरात के खेड़ा में नर्मदा का पानी पहुंचने के बाद राजस्थान माही के पूरे पानी का उपयोग कर सकता है। नर्मदा का पानी क्षेत्र में पहुंचने के बावजूद, राजस्थान को माही के पानी तक पूरी पहुंच नहीं मिली है, जिससे एक महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्र में बेकार बह रहा है। इस असंतुलन को सुधारने के लिए समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक गति और बजटीय कार्रवाई
राजस्थान सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में माही बेसिन के अतिरिक्त पानी को, विशेष रूप से मानसून के दौरान, जालोर जैसे सूखा प्रभावित जिलों तक पहुंचाने के लिए एक परियोजना के लिए ₹5,900 करोड़ का महत्वपूर्ण आवंटन किया है। इसने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है, जिसमें सांसद राजकुमार रोत ने माही समझौते की शर्तों के पुनर्मूल्यांकन की वकालत की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वागड़ क्षेत्र की जरूरतों को अन्य क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी मोड़ने से पहले पूरा किया जाना चाहिए, इस बात को उन्होंने सरकार को लिखे एक पत्र में भी व्यक्त किया।
क्यों मायने रखता है
माही जल-साझाकरण समझौते की समीक्षा से सूखे से प्रभावित पश्चिमी राजस्थान को आवश्यक पानी मिल सकता है, जिससे इसकी कृषि परिदृश्य में बदलाव आ सकता है और पानी की गंभीर कमी को दूर किया जा सकता है।
मुख्य तथ्य
- •Original Agreement Date: January 10, 1966
- •Mahi Dam Capacity: 77 TMC
- •Rajasthan's Current Share: 25-37 TMC
- •Gujarat's Current Share: 40 TMC
- •Rajasthan's Budget Allocation for…: ₹5,900 crore
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