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सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के आरोपी की जमानत खारिज की, ‘परजीवी’ कहा

Briovo· 17 Jun 2026, 04:42 pm IST
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के आरोपी की जमानत खारिज की, ‘परजीवी’ कहा

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया, साइबर अपराधियों को "परजीवी" कहा जो धोखे से नागरिकों को ठगते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ कठोर कानूनों की आवश्यकता पर जोर दिया, यह देखते हुए कि ऐसे अपराध अक्सर अखिल भारतीय होते हैं। अदालत ने डिजिटल धोखाधड़ी में वृद्धि पर प्रकाश डाला, जिसमें पिछले साल भारतीयों को ₹3,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। 2021-2023 के बीच साइबर अपराध के मामलों में 63% की वृद्धि हुई, जो 86,000 से अधिक हो गए। अदालत ने जोर दिया कि समाज के हित के लिए ऐसे अपराधियों को सलाखों के पीछे रखना आवश्यक है।

AI सारांश

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जमानत खारिज, आरोपी 'परजीवी' करार

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में शामिल एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया। कार्यवाही के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कड़ी मौखिक टिप्पणी करते हुए साइबर अपराधियों को "परजीवी" करार दिया जो भोले-भाले नागरिकों को उनकी मेहनत की कमाई से ठगते और धोखा देते हैं।

कठोर कानूनों की आवश्यकता

सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने देश में बढ़ते साइबर अपराध के खतरे से निपटने के लिए अधिक कठोर कानूनों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। अदालत ने जोर दिया कि ऐसे अपराधियों को सलाखों के पीछे रखकर ही समाज के हितों की सबसे अच्छी सेवा की जा सकती है, इन परिष्कृत वित्तीय अपराधों के अखिल भारतीय स्वरूप को रेखांकित करते हुए।

बढ़ते साइबर अपराध के आंकड़े

अदालत ने चौंकाने वाले आंकड़े बताए, जिसमें खुलासा हुआ कि पिछले साल के अंत तक भारतीय नागरिकों को अकेले डिजिटल धोखाधड़ी में कुल ₹3,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। इसके अलावा, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 और 2023 के बीच साइबर अपराध के मामलों में 63% की तेजी से वृद्धि हुई, जिनकी कुल संख्या 86,000 से अधिक हो गई।

संगठित नेटवर्क और बचाव के तरीके

केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने लगातार संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की महत्वपूर्ण उपस्थिति को उजागर किया है। ये परिष्कृत समूह राज्य की सीमाओं के पार काम करते हैं, पता लगने और कानून प्रवर्तन हस्तक्षेप से प्रभावी ढंग से बचने के लिए 'म्यूल' बैंक खातों, एन्क्रिप्टेड संचार चैनलों और विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसी युक्तियों का उपयोग करते हैं।

क्यों मायने रखता है

सुप्रीम कोर्ट का साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ा रुख ऑनलाइन घोटालों के बढ़ते खतरे और उनसे निपटने के लिए न्यायपालिका के संकल्प को उजागर करता है। यह फैसला साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए एक मिसाल कायम करता है, जो नागरिकों को वित्तीय शोषण से बचाने के लिए मजबूत कानूनों और प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता पर जोर देता है।

मुख्य तथ्य

  • Bail Denied: Supreme Court denied bail to a cyber fraud accused.
  • Judicial Observation: Court called cyber criminals 'parasites'.
  • Financial Loss: Indians lost over ₹3,000 crore to digital fraud last year.
  • Cybercrime Surge: Cybercrime cases increased by 63% between 2021 and 2023.
  • Total Cases (2021-23): Over 86,000 cybercrime cases recorded.

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