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धामी सरकार की मानसून से निपटने की तैयारी, पिछले आपदाओं का अनुभव बना आधार

Briovo· 03 Jul 2026, 07:31 pm IST
धामी सरकार की मानसून से निपटने की तैयारी, पिछले आपदाओं का अनुभव बना आधार

मानसून की शुरुआत के साथ उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। धामी सरकार पिछली आपदाओं के अनुभवों से सीख लेते हुए पूरी तैयारी का दावा कर रही है, जिसमें सभी 13 जिलों में अंतर-विभागीय समन्वय सुधारने के लिए मॉक ड्रिल भी शामिल है। हालांकि, ऐतिहासिक आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें सितंबर 2025 तक अकेले 260 मौतें और 1199 आपदा घटनाएं दर्ज की गईं। भूस्खलन और बाढ़ प्रमुख खतरे बने हुए हैं, और सड़क दुर्घटनाएं भी संकट को बढ़ा रही हैं। पिछले एक दशक में राज्य में 1000 से अधिक आपदा-संबंधी मौतें हुई हैं, जो पहाड़ी क्षेत्र में मानसून से उत्पन्न लगातार चुनौतियों को रेखांकित करती हैं।

AI सारांश

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मानसून का आगमन, खतरे में वृद्धि

मानसून के आगमन के साथ, उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि देखी जा रही है, खासकर भूस्खलन से महत्वपूर्ण सड़कें अवरुद्ध हो रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा तैयारियों के दावों के बावजूद, यह स्थिति सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है।

सरकार की तैयारी के प्रयास

सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को अपनी तत्परता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं राज्य के सभी 13 जिलों में आयोजित मॉक ड्रिल की निगरानी की, जिसका उद्देश्य संकट की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में सुधार करना है। ये अभ्यास पिछले अनुभवों पर आधारित एक सक्रिय कदम हैं।

आपदाओं का एक दशक

उत्तराखंड का मानसून-संबंधी आपदाओं से पीड़ित होने का लंबा इतिहास रहा है। 2015 से 2024 के बीच, राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से 1000-1100 मौतें हुईं। अकेले 2025 में, सितंबर तक, 260 मौतें और 1199 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 700 बादल फटने/बाढ़ और 1034 भूस्खलन शामिल हैं, जो निरंतर विनाशकारी प्रभाव को उजागर करता है।

सड़क दुर्घटनाएँ भी बढ़ा रही मौतें

प्राकृतिक घटनाओं के अलावा, सड़क दुर्घटनाएँ उत्तराखंड में मरने वालों की संख्या में महत्वपूर्ण योगदान करती हैं। 2022 से 2024 तक, प्रति वर्ष 950 से अधिक मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं। भूस्खलन से 35-40% और बाढ़/भारी बारिश से 25-30% आपदा-संबंधी मौतें होती हैं, जिससे बचाव और राहत प्रयासों पर और दबाव पड़ता है।

अधिकारी बेहतर समन्वय का वादा करते हैं

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सभी 13 जिलों ने अपनी आपदा तैयारी पूरी कर ली है। उन्होंने बचाव कार्यों में शामिल विभिन्न विभागों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने यह भी बताया कि पहले अछूते रहे क्षेत्रों में भी मॉक ड्रिल आयोजित किए गए थे ताकि कमियों की पहचान कर उन्हें तुरंत दूर किया जा सके।

क्यों मायने रखता है

उत्तराखंड में मानसून लगातार प्राकृतिक आपदाएँ लाता है, जिससे भारी जान-माल का नुकसान होता है। राज्य के निवासियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रभावी आपदा प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

मुख्य तथ्य

  • 2025 Deaths (to Sept): 260
  • 2025 Disaster Incidents (to Sept): 1199
  • 2024 Deaths: 384
  • 2024 Disaster Incidents: 3244
  • Total Deaths (2015-2024 decade): 1000-1100
  • 2023 Landslides: 1123

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