छत्तीसगढ़ टाइगर रिजर्व में AI निगरानी से वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व शिकार और तस्करी से निपटने के लिए AI-आधारित स्मार्ट निगरानी प्रणाली लागू कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य बाघों की घटती आबादी (जो अब शून्य हो गई है) और गंभीर रूप से कम हुई जंगली भैंसों की संख्या को पुनर्जीवित करना है। यह प्रणाली टावर पर लगे कैमरों का उपयोग करके वन्यजीवों की गतिविधियों और मानवीय घुसपैठ का पता लगाएगी, और वन कर्मचारियों को तत्काल अलर्ट भेजेगी। इस तकनीकी उन्नयन का लक्ष्य निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाना है, खासकर मोबाइल नेटवर्क कवरेज से वंचित दूरदराज के क्षेत्रों में, जिससे रिजर्व में संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
AI सारांश
3 bulletsशिकार रोकने के लिए AI निगरानी
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में AI-आधारित स्मार्ट निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। इस उन्नत तकनीक का उद्देश्य शिकारियों और तस्करों के खिलाफ सुरक्षा बढ़ाना है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से रिजर्व के भीतर वन्यजीवों की आबादी और सदियों पुराने पेड़ों को नष्ट कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बाघों की आबादी घटकर शून्य हो गई थी और जंगली भैंसे विलुप्त होने के कगार पर थे।
वन्यजीवों की आबादी में भारी गिरावट
रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों की आबादी में भारी गिरावट देखी गई है। 1990 के दशक में 18 बाघों की संख्या अब शून्य हो गई है, और लगभग 80 की पिछली गिनती से अब केवल एक जंगली भैंसा बचा है। पैंथर, गौर, सांभर, नीलगाय, चित्तीदार हिरण और जंगली सुअर जैसी अन्य प्रजातियों में भी मुख्य रूप से लगातार शिकार गतिविधियों के कारण काफी कमी आई है।
AI प्रणाली कैसे काम करती है
निगरानी प्रणाली 60 फीट से अधिक ऊंचे टावरों पर लगे ट्रॉली कैमरों का उपयोग करेगी ताकि वास्तविक समय की निगरानी प्रदान की जा सके। AI द्वारा संचालित ये पोर्टेबल कैमरे, प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों की स्वचालित रूप से पहचान करेंगे और शिकारियों और तस्करों जैसे मानवीय घुसपैठ का पता लगाएंगे। पता लगने पर, प्रणाली व्हाट्सएप, एसएमएस और स्वचालित कॉल के माध्यम से फ्रंटलाइन वन कर्मचारियों को तत्काल अलर्ट भेजेगी, जिससे चुनौतीपूर्ण वन परिदृश्यों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी।
चरणबद्ध कार्यान्वयन और रणनीतिक स्थान
यह परियोजना अगले सप्ताह से जुलाई के अंत तक चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। ₹2.5 लाख से ₹3 लाख प्रत्येक की लागत वाली ऐसी छह प्रणालियाँ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी। इनमें कुलहाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखंड उत्तर उदंती रेंज शामिल हैं, जो हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण गलियारे, साथ ही अवैध व्यापार के रास्ते के रूप में जाने जाते हैं।
संरक्षण के लिए एकीकृत प्रौद्योगिकी
यह AI पहल रिजर्व के भीतर मौजूदा तकनीकी प्रयासों पर आधारित है। उदंती-सीतानदी पहले से ही शिकार-विरोधी अभियानों, आवास निगरानी और आग का पता लगाने के लिए ड्रोन-आधारित निगरानी का उपयोग करती है। इसके अतिरिक्त, वन आवरण परिवर्तन को ट्रैक करने और आवास बहाली का प्रबंधन करने के लिए भू-स्थानिक विश्लेषण के लिए उपग्रह इमेजरी और गूगल अर्थ इंजन का उपयोग किया जाता है, जो आधुनिक संरक्षण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदर्शित करता है।
क्यों मायने रखता है
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में AI निगरानी की तैनाती बाघों और जंगली भैंसों जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी आबादी में भारी गिरावट आई है। शिकार और तस्करी पर अंकुश लगाकर, यह तकनीक जैव विविधता को बहाल करने और इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।
मुख्य तथ्य
- •Tiger Population Decline: From 18 in the 1990s to zero
- •Wild Buffalo Population Decline: From 80 to 7, now only 1 survives
- •AI System Cost: ₹2.5 lakh to ₹3 lakh per system
- •Number of Systems to be Installed: Six systems
- •Key Species Monitored by AI: Asian elephants, tigers, leopards, sloth bears
- •Encroached Land Cleared: 956 hectares in the last four years
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