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यूपी पुलिस ने फर्जी एमएलएम जॉब स्कैम का भंडाफोड़ किया, 300 युवकों को बचाया

Briovo· 11 Jul 2026, 08:49 am IST
यूपी पुलिस ने फर्जी एमएलएम जॉब स्कैम का भंडाफोड़ किया, 300 युवकों को बचाया

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने साइबर वज्र अभियान के तहत वाराणसी में एक फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) जॉब स्कैम में शामिल 300 युवकों को बचाया और 19 लोगों को गिरफ्तार किया। धोखेबाजों ने "महादेव एंटरप्राइजेज" के नाम से रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड की फ्रेंचाइजी होने का झूठा दावा करके बेरोजगार युवाओं को ऊंची सैलरी वाली नौकरियों का झांसा दिया। उन्होंने पंजीकरण शुल्क के रूप में ₹30,000-₹35,000 लिए, जिसके बदले में नाममात्र की किटें दीं। पीड़ितों को फिर पिरामिड योजना में और लोगों की भर्ती करने के लिए दबाव डाला गया, ऐसा न करने पर भुगतान न करने की धमकी दी गई। इस गिरोह ने पिछले एक साल में बैंक खातों के माध्यम से लगभग ₹4 करोड़ का लेन-देन किया। आगे की जांच जारी है।

AI सारांश

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ऑपरेशन साइबर वज्र की सफलता

उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर वज्र अभियान के तहत, वाराणसी पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट ने एक फर्जी प्रशिक्षण केंद्र से लगभग 300 युवाओं को सफलतापूर्वक बचाया। इस बड़े पैमाने के ऑपरेशन के परिणामस्वरूप अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट के कथित सरगना सहित 19 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया।

घोटाले का तरीका

आरोपियों ने महादेव एंटरप्राइजेज नामक एक कॉर्पोरेट कार्यालय के रूप में अवैध मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) और पिरामिड योजना चलाई। उन्होंने रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड की फ्रेंचाइजी होने का झूठा दावा किया, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के बेरोजगार युवाओं को वाराणसी में उच्च-वेतन वाली नौकरियों का वादा करके आकर्षित किया।

धोखाधड़ी और शोषण

युवाओं को वाराणसी आमंत्रित किया गया, एक पेशेवर रूप से डिजाइन किए गए नकली कॉर्पोरेट कार्यालय में साक्षात्कार लिया गया, और फिर पंजीकरण शुल्क के रूप में ₹30,000-₹35,000 का भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया। बदले में, उन्हें केवल ₹1,000-₹2,000 मूल्य की बुनियादी किटें मिलीं। बाद में, उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों में ले जाया गया और मनोवैज्ञानिक रूप से हेरफेर किया गया, योजना में कम से कम तीन रिश्तेदारों या दोस्तों की भर्ती के लिए दबाव डाला गया, विफल रहने पर भुगतान न करने की धमकी दी गई।

वित्तीय लेनदेन और बरामदगी

गिरोह के बैंक खातों की प्रारंभिक जांच से पिछले एक साल में लगभग ₹4 करोड़ के लेनदेन का पता चला, जो एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी का संकेत देता है। पुलिस ने 20 मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एक ASUS लैपटॉप, दो चार पहिया वाहन, ₹4,020 नकद, बैंक खातों में लगभग ₹1 लाख और महादेव एंटरप्राइजेज से संबंधित विभिन्न कॉर्पोरेट दस्तावेज बरामद किए।

जारी जांच और गिरफ्तारियां

अब तक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर और लिखित प्रस्तुतियों के माध्यम से आरोपियों के खिलाफ नौ शिकायतें दर्ज की गई हैं। जमुई, बिहार के कथित सरगना दीपक कुमार शाह (31) को बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 18 अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया है। पुलिस रैकेट के बारीक विवरणों की जांच जारी रखे हुए है।

क्यों मायने रखता है

यह घटना बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाने वाले नौकरी घोटालों के व्यापक मुद्दे पर प्रकाश डालती है, जो व्यक्तियों का आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से शोषण करने वाली धोखाधड़ी वाली मल्टी-लेवल मार्केटिंग योजनाओं के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देती है।

मुख्य तथ्य

  • Youths Rescued: 300
  • Arrests Made: 19
  • Scam Amount Processed: ₹4 Crore
  • Company Name: Mahadev Enterprises (fake)
  • Joining/Registration Fee: ₹30,000-₹35,000

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