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कोटा में किडनी फेल होने के बाद गर्भवती महिलाएं मांग रहीं इच्छा मृत्यु

Briovo· 18 Jul 2026, 03:23 pm IST
कोटा में किडनी फेल होने के बाद गर्भवती महिलाएं मांग रहीं इच्छा मृत्यु

कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से पीड़ित पांच में से चार महिलाओं ने सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट या इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। वे दो महीने से अधिक समय से डायलिसिस की पीड़ा झेलने का आरोप लगा रही हैं। इन महिलाओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा है और आगे डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण एक महिला को आईसीयू में भी शिफ्ट करना पड़ा। इसी बीच, बांसवाड़ा में चिकित्सा मंत्री ने पांच प्रसूताओं की मौत में से केवल दो को ही "जांच योग्य" बताया, बाकी को पहले की स्थिति या दूसरे राज्य से होने के कारण खारिज कर दिया। इससे प्रभावित परिवारों में आक्रोश फैल गया है।

AI सारांश

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कोटा की महिलाएं मांग रहीं इच्छा मृत्यु

मई में सिजेरियन डिलीवरी के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुईं चार महिलाओं को किडनी फेलियर हो गया है और वे अब सरकार से इच्छा मृत्यु या किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति मांग रही हैं। वे दो महीने से अधिक समय से दर्दनाक डायलिसिस से गुजर रही हैं और उन्होंने अपनी दुर्दशा व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है।

डायलिसिस से इनकार और बिगड़ता स्वास्थ्य

निरंतर डायलिसिस के तीव्र दर्द और पीड़ा को महसूस करते हुए, दो प्रभावित महिलाओं, पिंकी और आरती ने बुधवार को आगे डायलिसिस से इनकार कर दिया। नतीजतन, आरती का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ गया, जिससे उन्हें तत्काल आईसीयू में स्थानांतरित करना पड़ा। महिलाओं का दावा है कि उनकी किडनी ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का बयान

कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि महिलाओं की हालत स्थिर है और आवश्यकतानुसार डायलिसिस जारी रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट पर निर्णय मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद 3 से 6 महीने बाद ही लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि डायलिसिस बंद होने के लिए उनकी किडनी को अपने आप ठीक होने की आवश्यकता है।

मंत्री ने खारिज की अधिकतर बांसवाड़ा मौतें

एक अलग लेकिन संबंधित घटना में, पांच गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बांसवाड़ा के एमजी अस्पताल का दौरा किया। चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने केवल दो मौतों को 'जांच योग्य' घोषित किया, एक को मध्य प्रदेश से बताया और दूसरी को गर्भपात की गोलियों से पहले से महत्वपूर्ण स्थिति में होने के कारण खारिज कर दिया। उनके त्वरित दौरे और परिवारों से बातचीत न करने की आलोचना हुई।

क्यों मायने रखता है

सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने और इच्छा मृत्यु की मांग करने वाली महिलाओं के दुखद मामले मातृ स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सीय जवाबदेही पर गंभीर चिंताएं उजागर करते हैं। बांसवाड़ा में मातृ मृत्यु को लेकर लापरवाही भरा रवैया ऐसी घटनाओं में गहन जांच और पारदर्शिता की आवश्यकता को और बढ़ाता है।

मुख्य तथ्य

  • Affected Women (Kota): 4 out of 5
  • Reason for Kidney Failure: Post-C-section complications
  • Duration of Hospitalization/Dialysis: Over 70 days
  • Women Refusing Dialysis: 2 (with one shifted to ICU)
  • Maternal Deaths (Banswara): 5
  • Deaths Deemed Investigable by…: 2 out of 5

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