मुंबई: डिजिटल अरेस्ट स्कैम में कारोबारी ने गंवाए ₹8 करोड़
दिल्ली पुलिस की चेतावनी के बावजूद मुंबई के एक बुजुर्ग कारोबारी को "डिजिटल अरेस्ट" साइबर धोखाधड़ी में 7.90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। स्कैमर्स ने दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर 73 वर्षीय कारोबारी को यह विश्वास दिलाया कि उसकी पहचान का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया गया है। उन्होंने फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा और उसे छह बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पुलिस ने 1.10 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं और पांच राज्यों में 200 ‘म्यूल’ खातों की पहचान की है। पीड़ित को ठगी का एहसास तब हुआ जब उसके खाते खाली हो गए और उस पर और पैसे उधार लेने का दबाव डाला गया।
AI सारांश
3 bulletsडिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी का खुलासा
मुंबई के अंधेरी पश्चिम में एक बुजुर्ग कारोबारी 'डिजिटल अरेस्ट' नामक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गया, जिसमें उसे ₹7.90 करोड़ का भारी नुकसान हुआ। धोखेबाजों ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों का प्रतिरूपण करके एक विस्तृत योजना बनाई, जिसमें 73 वर्षीय बुजुर्ग को यह विश्वास दिलाया गया कि उसकी पहचान एक हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दुरुपयोग की गई है।
पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज किया
I4C के माध्यम से दिल्ली पुलिस से एक अलर्ट मिलने के बावजूद, मुंबई साइबर पुलिस और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने दो दिनों तक कारोबारी के घर जाकर उसे चेतावनी देने की कोशिश की। हालांकि, 'डिजिटल अरेस्ट' और एक फर्जी वारंट के डर से फंसे पीड़ित ने दरवाजा खोलने से इनकार कर दिया, यहां तक कि असली पुलिस अधिकारियों पर भी भरोसा नहीं किया।
ठगों का तरीका
धोखेबाजों ने एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर का इस्तेमाल किया, खुद को दिल्ली पुलिस का एक वरिष्ठ अधिकारी बताया और पुलिस वर्दी की प्रोफाइल तस्वीर के साथ एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित के दस्तावेजों का इस्तेमाल जेट एयरवेज के नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया गया था, और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए उसे दो सप्ताह से अधिक समय तक छह अलग-अलग बैंक खातों में धन हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया।
जांच और रिकवरी के प्रयास
शिकायत मिलते ही मुंबई पुलिस ने तुरंत चोरी हुए धन में से ₹1.10 करोड़ फ्रीज कर दिए। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पैसा पांच अलग-अलग राज्यों में फैले लगभग 200 'म्यूल' बैंक खातों के माध्यम से भेजा गया था, जो एक व्यापक नेटवर्क का संकेत है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी परिष्कृत साइबर धोखाधड़ी के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह दर्शाता है कि कैसे भय और मनोवैज्ञानिक हेरफेर सामान्य ज्ञान पर हावी हो सकते हैं, भले ही वैध कानून प्रवर्तन हस्तक्षेप करने का प्रयास करे। ऐसे घोटालों के संकेतों को पहचानना और आधिकारिक चैनलों पर भरोसा करना वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए सर्वोपरि है।
क्यों मायने रखता है
यह घटना साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और विशेषकर बुजुर्गों की "डिजिटल अरेस्ट" घोटालों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है। यह जन जागरूकता अभियानों और कानून प्रवर्तन के हस्तक्षेप पर तत्काल कार्रवाई के महत्व पर भी जोर देती है, क्योंकि पीड़ित को चेतावनी देने के पुलिस के प्रयासों को शुरुआत में नजरअंदाज कर दिया गया था।
मुख्य तथ्य
- •Amount Lost: ₹7.90 Crore
- •Victim's Age: 73 years
- •Scam Duration: Approx. 2 weeks
- •Accounts Used: 6 primary accounts, 200 mule accounts in 5 states
- •Amount Frozen: ₹1.10 Crore
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