CJP संसद मार्च में पेलेट गन के इस्तेमाल से बहस तेज
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा हाल ही में किए गए संसद मार्च के दौरान पेलेट गन के कथित इस्तेमाल ने भारत में भीड़ नियंत्रण के लिए उनके उपयोग को लेकर विवाद फिर से खड़ा कर दिया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि दिल्ली पुलिस ने ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है। हालांकि, एक आंतरिक पुलिस रिपोर्ट से पता चलता है कि दंगा-रोधी बंदूक से दो राउंड फायर किए गए थे। चार प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें एक 19 वर्षीय प्रदर्शनकारी की आंखों की रोशनी जाने का खतरा है। पेलेट गन, जिन्हें पहली बार 2010 में जम्मू-कश्मीर में पेश किया गया था, का गंभीर नुकसान पहुंचाने का इतिहास रहा है, जिसके कारण इन पर प्रतिबंध लगाने और विकल्पों की तलाश करने की मांग की जा रही है।
AI सारांश
3 bulletsदिल्ली में हालिया विवाद
20 जुलाई, 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित संसद मार्च के दौरान, पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप सामने आए, जिससे आलोचना की एक नई लहर पैदा हुई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना की कड़ी निंदा की और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
सामने आए विरोधाभासी बयान
जहां केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया, वहीं द हिंदू की एक विशेष रिपोर्ट में एक सामान्य डायरी प्रविष्टि का खुलासा हुआ, जिसमें एक दंगा-रोधी बंदूक से दो राउंड फायर होने की पुष्टि हुई। इस विसंगति ने आधिकारिक बयानों के बारे में आगे की बहस और संदेह को हवा दी है।
गंभीर चोटें सामने आईं
विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पेलेट गन के इस्तेमाल के संबंध में चार व्यक्तियों को गंभीर चोटें आईं। उनमें से एक 19 वर्षीय प्रदर्शनकारी वर्तमान में एम्स जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज करा रहा है और उसकी दाहिनी आंख की रोशनी जाने का गंभीर खतरा है, जो इन हथियारों के विनाशकारी प्रभाव को उजागर करता है।
पेलेट गन के इस्तेमाल का ऐतिहासिक संदर्भ
पेलेट गन को पहली बार 2010 में जम्मू-कश्मीर में माचिल फर्जी मुठभेड़ मामले के बाद नागरिक अशांति के दौरान भारत में पेश किया गया था। 2016 के बुरहान वानी विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनका उपयोग तेज हो गया, जिससे कश्मीर में 'मृत आंखों का एक महामारी' पैदा हो गई। 2018 में शोपियां में हुई घटनाओं और 2018 में 19 महीने की हिब्बा जान को गंभीर चोट लगने से उनकी विवादास्पद स्थिति और मजबूत हो गई, इसके बावजूद कि सरकार ने उनके उपयोग को कम करने का वादा किया था।
लगातार बहस और विकल्पों की मांग
पेलेट गन से जुड़ी बार-बार होने वाली घटनाओं ने लगातार जनता के गुस्से को भड़काया है और उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आलोचकों का तर्क है कि 'गैर-घातक' कहे जाने के बावजूद, ये हथियार स्थायी और दुर्बल करने वाली चोटें पहुंचाते हैं। यह लगातार बहस प्रभावी और वास्तव में गैर-हानिकारक भीड़ नियंत्रण विकल्पों की तलाश की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है।
क्यों मायने रखता है
पेलेट गन को गैर-घातक श्रेणी में रखा गया है, फिर भी वे अंधापन जैसी गंभीर, अक्सर स्थायी चोटें पहुंचाती हैं। भीड़ नियंत्रण में उनके निरंतर उपयोग से मानवाधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं और भारत में पुलिसिंग रणनीति के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है।
मुख्य तथ्य
- •Incident Date: July 20, 2026
- •Location: Parliament March, New Delhi
- •Injuries Reported: 4 serious injuries, one protester at risk of losing vision
- •Political Reaction: Rahul Gandhi demanded Home Minister's resignation
- •Police Stance: Delhi Police denied pellet gun use, but internal report suggests otherwise
- •Origin of Use: Introduced in J&K in 2010
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…